मुंबई । मंगलवार, 9 जून 2026
मुंबई शहर इस समय एक अभूतपूर्व दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक तरफ जहां झीलों में पानी का स्तर गिरने से पूरे शहर में पहले से ही 10 फीसदी पानी की कटौती लागू है, वहीं दूसरी तरफ मुंबई वाटर टैंकर एसोसिएशन (MWTA) की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने आग में घी का काम किया है। इस गहराते संकट के बीच, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने पानी की कालाबाजारी और अवैध फेरों को पूरी तरह रोकने के लिए एक बेहद सख्त और क्रांतिकारी डिजिटल नीति तैयार की है।
बेंगलुरु के ‘संचारी कावेरी’ मॉडल की तर्ज पर अब मुंबई में पानी के टैंकरों का वितरण पूरी तरह से वन-टाइम पासवर्ड (OTP) और रीयल-टाइम ट्रैकिंग पर आधारित होगा।
पानी की चोरी रोकने के लिए BMC का ‘OTP’ चक्रव्यूह
बीएमसी के हाइड्रोलिक विभाग द्वारा तैयार की जा रही इस नई व्यवस्था के तहत अब मुंबई में पीने के पानी के लिए टैंकरों की बुकिंग पूरी तरह डिजिटल होगी। वर्तमान व्यवस्था में एक बार चालान या परमिट जारी होने के बाद टैंकर चालकों द्वारा तय सीमा से अधिक पानी निकालने और अवैध रूप से कई चक्कर लगाने की गंभीर शिकायतें आ रही थीं।
नई व्यवस्था इस तरह काम करेगी:
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ऑनलाइन बुकिंग: हाउसिंग सोसायटियों, होटलों या अन्य व्यावसायिक ग्राहकों को बीएमसी के पोर्टल के जरिए ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी।
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रजिस्टर्ड मोबाइल पर OTP: बुकिंग कन्फर्म होते ही उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक सुरक्षित OTP भेजा जाएगा।
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बिना OTP नो पानी: टैंकर चालकों को बीएमसी के निर्धारित 33 वाटर फिलिंग पॉइंट्स से पानी लोड करने के लिए उपभोक्ताओं से मिले इस वैध OTP को सिस्टम में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। इसके बिना उन्हें पानी आवंटित नहीं किया जाएगा।
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डिजिटल डैशबोर्ड: इस पूरी प्रक्रिया की रीयल-टाइम ट्रैकिंग (वास्तविक समय में निगरानी) के लिए बीएमसी एक नया डिजिटल डैशबोर्ड भी लॉन्च करने जा रही है, जिससे हर टैंकर की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी।
क्यों हड़ताल पर है मुंबई वाटर टैंकर एसोसिएशन (MWTA)?
बीएमसी जहां एक तरफ वितरण व्यवस्था को सुधार रही है, वहीं दूसरी तरफ 7 जून 2026 की मध्यरात्रि से मुंबई के निजी टैंकरों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं। इस हड़ताल के कारण हाउसिंग सोसायटियों, अस्पतालों, रेलवे ऑपरेशन्स और बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में हाहाकार मच गया है।
इस विवाद की मुख्य वजह केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के कड़े दिशा-निर्देश और स्थानीय प्रशासन (तहसीलदार कार्यालय) द्वारा निजी कुओं और बोरवेल मालिकों को जारी किए गए नोटिस हैं।
टैंकर ऑपरेटरों की नाराजगी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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NOC की अनिवार्यता: प्रशासन ने आदेश दिया है कि सभी निजी कुओं और बोरवेल से पानी निकालने के लिए 7 दिनों के भीतर CGWA से नया अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लिया जाए, अन्यथा भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
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महंगे डिजिटल मीटर और GPS: नियमों के तहत हर टैंकर में टेलीमेट्री सिस्टम के साथ डिजिटल वाटर फ्लो मीटर और GPS ट्रैकिंग लगाना जरूरी है। एसोसिएशन का कहना है कि मुंबई में इन मीटरों का रख-रखाव और इन्हें बाहर से मंगवाना बेहद खर्चीला है।
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जमीन की शर्त: दिशा-निर्देशों के अनुसार, कुआं मालिक के पास कम से कम 20,000 वर्ग मीटर भूमि होनी चाहिए, जो मुंबई जैसे कम जगह वाले शहर में व्यावहारिक रूप से असंभव है।
संकट का असर: रेलवे से लेकर सोसायटियों तक सब परेशान
मुंबई की झीलों (जैसे तानसा, भातसा, वैतरणा) में पानी का स्टॉक घटकर करीब 13% रह गया है। इस बीच टैंकरों की हड़ताल ने संकट को और गंभीर बना दिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर जहां रोजाना 144 टैंकरों की जरूरत होती है, वहां बेहद कम टैंकर पहुंच पा रहे हैं, जिसके कारण ट्रेनों की धुलाई और अन्य गैर-पेयजल कार्यों को फिलहाल इगतपुरी या भुसावल शिफ्ट करना पड़ा है।
आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act) लागू करने की तैयारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीएमसी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, निगम प्रशासन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act) की धाराओं को लागू करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत बीएमसी आवश्यक सेवाओं को बहाल रखने के लिए निजी कुओं, बोरवेलों और वाटर टैंकरों को अस्थाई रूप से अपने सीधे नियंत्रण में ले सकती है।
मुंबई वाटर टैंकर एसोसिएशन के पदाधिकारियों की आज मुख्यमंत्री के साथ एक अहम बैठक प्रस्तावित है। जब तक कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक टैंकर मालिकों ने अपनी हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है।
Matribhumisamachar


