नई दिल्ली. टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट के दौरान भारतीय खिलाड़ी अपने परिवार—पत्नी, मंगेतर या बच्चों—को साथ नहीं रख सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य खिलाड़ियों की एकाग्रता बढ़ाना और “टीम-फर्स्ट” संस्कृति को मजबूत करना बताया गया है।
BCCI की ‘नो-फैमिली’ पॉलिसी: क्या हैं मुख्य नियम
BCCI ने टीम मैनेजमेंट की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें खिलाड़ियों के परिवारों को साथ यात्रा करने और टीम होटल में ठहराने की अनुमति मांगी गई थी।
1. नियमों की रूपरेखा
- समय-सीमा नियम: मौजूदा नीति के अनुसार परिवार को केवल 45 दिनों से अधिक लंबे विदेशी दौरों पर ही, वह भी अधिकतम 14 दिनों के लिए अनुमति मिलती है।
- टी20 वर्ल्ड कप पर लागू: चूंकि यह टूर्नामेंट इस समय-सीमा की शर्तों में नहीं आता और अधिकांश मैच भारत में हो रहे हैं, इसलिए परिवार को साथ रखने की अनुमति नहीं दी गई।
- अलग ठहराव व्यवस्था: यदि परिवार मैच देखने आता है, तो वे टीम होटल में नहीं रुक सकेंगे। खिलाड़ियों को उनके लिए अलग निजी व्यवस्था करनी होगी और पूरा खर्च खुद उठाना होगा।
2. सख्त प्रतिबंध
- टीम होटल में प्रवेश वर्जित: परिवार के सदस्य खिलाड़ियों के कमरों में नहीं ठहर सकेंगे।
- यात्रा नियम: खिलाड़ियों के लिए केवल टीम बस से यात्रा करना अनिवार्य होगा, निजी वाहन की अनुमति नहीं होगी।
- निजी स्टाफ पर रोक: निजी मैनेजर, एजेंट या शेफ टीम होटल में नहीं रुक सकेंगे।
BCCI इतना सख्त क्यों? फैसले के पीछे की वजह
- अनुशासन से जुड़ी शिकायतें: 2024-25 की बॉर्डर‑गावस्कर ट्रॉफी के दौरान कुछ खिलाड़ियों के पारिवारिक कारणों से टीम बैठकों और रणनीतिक सत्रों में अनुपस्थित रहने की बातें सामने आई थीं।
- खराब प्रदर्शन का दबाव: ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ हालिया सीरीज़ में मिले निराशाजनक नतीजों के बाद बोर्ड ने अनुशासन पर और कड़ा रुख अपनाया।
- कोचिंग सोच: भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट किसी भी तरह से छुट्टी नहीं होते—यहां खिलाड़ियों का पूरा ध्यान केवल खेल और रणनीति पर होना चाहिए।
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वर्तमान स्थिति (फरवरी 2026)
भारतीय टीम इस समय सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टी20 वर्ल्ड कप अभियान में जुटी हुई है। बोर्ड का मानना है कि बाहरी व्यवधानों से दूरी बनाकर ही खिलाड़ी ट्रॉफी जीतने के लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित रह सकते हैं।
खास बात: भारतीय टीम अपने लीग चरण के अधिकतर मुकाबले भारत में खेलेगी। पाकिस्तान के खिलाफ हाई-वोल्टेज मुकाबले के लिए टीम को कोलंबो (श्रीलंका) जाना होगा, लेकिन वहां भी परिवार साथ रखने के नियम में किसी तरह की छूट नहीं दी गई है।
BCCI की ‘नो-फैमिली’ पॉलिसी भले ही सख्त लगे, लेकिन बोर्ड का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में अनुशासन, एकाग्रता और टीम भावना ही जीत की कुंजी होती है। अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि यह फैसला भारतीय टीम के प्रदर्शन पर कितना सकारात्मक असर डालता है।
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