शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 07:20:26 PM

शिक्षामित्रों के लिए बड़ी खुशखबरी: इलाहाबाद हाई कोर्ट का नियमितीकरण पर राज्य सरकार को 2 माह का अल्टीमेटम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

प्रयागराज. उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों के लिए एक बड़ी राहत और उम्मीद की खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक के रूप में नियमितीकरण (Regularization) के मामले में राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर अगले दो महीनों के भीतर ठोस निर्णय ले।

क्या है पूरा मामला?

यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने तेज बहादुर मौर्य और 114 अन्य शिक्षामित्रों द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने दलील दी कि ये शिक्षामित्र वर्षों से बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे हैं।

फैसले की 3 मुख्य बातें:

  1. प्रत्यावेदन जमा करना: कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया है कि वे 3 सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत प्रत्यावेदन (Representation) अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा को सौंपें।

  2. सरकार की समय सीमा: प्रत्यावेदन मिलने के बाद, राज्य सरकार को 2 माह के भीतर नियमितीकरण के मुद्दे पर विचार करना होगा और अपना अंतिम निर्णय सुनाना होगा।

  3. नया कानूनी आधार: याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के 11 जून 2025 के नए आदेश का भी हवाला दिया गया है, जो शिक्षामित्रों के पक्ष में एक मजबूत आधार बनाता है।

कोर्ट में सरकार का तर्क

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि नियमितीकरण एक ‘नीतिगत मामला’ है और कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘बदली हुई परिस्थितियों’ और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में इस पर पुनर्विचार करना आवश्यक है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से शिक्षामित्र अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सरकार को औपचारिक रूप से यह स्पष्ट करना होगा कि वह शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के रूप में स्वीकार करने के लिए क्या कदम उठा रही है।

विशेष टिप्पणी: “यह आदेश केवल 114 याचियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों के लिए एक नजीर (Precedent) साबित होगा।”

यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग की ताजा खबरें और शिक्षामित्रों के मानदेय पर अपडेट

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।