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मेक इन इंडिया का नया धमाका: अब भारत में बनेगा इजरायल का ‘आयरन डोम’ मिसाइल इंटरसेप्टर!

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आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम का इन्फोग्राफिक आरेख जिसमें रडार, युद्धक्षेत्र नियंत्रण प्रणाली और तामिर मिसाइल इंटरसेप्टर के काम करने का तरीका दिखाया गया है

नई दिल्ली । शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

भारतीय रक्षा जगत से इन दिनों एक के बाद एक ऐसी खबरें आ रही हैं, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाती हैं। एक तरफ जहां दुनिया के कई देश हमारी स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने के लिए कतार में खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया से एक और बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है।

दुनिया के सबसे अचूक और बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम्स में गिने जाने वाले इजरायल के आयरन डोम (Iron Dome) को तो आप जानते ही होंगे। ताजा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब इस सुपर-एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम के सबसे मुख्य हिस्से यानी ‘मिसाइल इंटरसेप्टर’ का निर्माण हमारे अपने देश भारत में होने जा रहा है! इजरायल की दिग्गज रक्षा कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) इस सिलसिले में भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ एडवांस लेवल पर बातचीत कर रही है।

भारत बनेगा दुनिया का तीसरा बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब

‘द यरुशलम पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह बातचीत अंतिम रूप ले लेती है, तो भारत पूरी दुनिया में इजरायल और अमेरिका के बाद तीसरा ऐसा देश बन जाएगा, जिसके पास आयरन डोम के इंटरसेप्टर बनाने की तकनीक और प्लांट होगा। वर्तमान में इजरायल अपने उत्तरी प्लांट में इसे बनाता है, जबकि पिछले साल ही अमेरिका में ‘रेथियॉन’ (Raytheon) कंपनी के साथ मिलकर एक प्रोडक्शन लाइन शुरू की गई है। अब इस एलीट लिस्ट में भारत का नाम जुड़ना हमारे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की वैश्विक साख का जीता-जागता सबूत है।

‘मिशन सुदर्शन चक्र’ को मिलेगी नई उड़ान

भारत सरकार ने देश की हवाई सुरक्षा को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए साल 2035 तक ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यह भारत का अपना एक मल्टी-लेयर एयर डिफेंस कवच (Integrated Air and Missile Defence) होगा। भारत और इजरायल का रक्षा सहयोग पहले से ही काफी मजबूत है; हम लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली बराक-8 (Barak-8) का इस्तेमाल अपनी तीनों सेनाओं में संयुक्त रूप से कर रहे हैं।इसके अलावा, इजरायल की एल्बिट सिस्टम्स (Elbit Systems) भारत में ही अपने हर्मीस ड्रोन्स के पार्ट्स का निर्माण करती है।

कम दूरी के खतरों (जैसे दुश्मन के ड्रोन या रॉकेट हमलों) से निपटने के लिए भारत जहां अपनी स्वदेशी प्रणालियों के विकास पर भी जोर दे रहा है, वहीं इस स्तर पर आयरन डोम के इंटरसेप्टर का भारत में बनना हमारे ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की तकनीक को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

इजरायल भारत को ही क्यों चुन रहा है?

इसके पीछे कुछ बहुत ही मजबूत रणनीतिक और व्यावसायिक कारण छिपे हैं:

  1. उत्पादन लागत में कमी (Cost Effectiveness): भारत में कुशल इंजीनियर और अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण मिसाइलों की उत्पादन लागत काफी कम हो जाएगी।

  2. ग्लोबल सप्लाई चेन का बैकअप: ईरान और इजरायल के बीच हालिया संघर्षों के बाद इजरायल को बड़े पैमाने पर इंटरसेप्टर्स की जरूरत पड़ी है। भारत जैसा सुरक्षित और विश्वसनीय देश उनके लिए एक बेहतरीन ग्लोबल सप्लायर बैकअप साबित हो सकता है।

  3. भारत की सख्त नीतियां: भारत अब केवल विदेशी हथियारों का खरीदार नहीं रहना चाहता। हमारी नीति साफ है—’अगर भारत को बेचना है, तो भारत में बनाना होगा और यहीं से एक्सपोर्ट भी करना होगा।’ राफेल कंपनी भारत की इसी शर्त को अपनाकर नए निर्यात बाजारों तक पहुंच बनाना चाहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: आयरन डोम क्या है और यह कैसे काम करता है?

उत्तर: आयरन डोम इजरायल का एक मोबाइल और हर मौसम में काम करने वाला एयर डिफेंस सिस्टम है। यह कम दूरी के रॉकेट, तोपखाने के गोलों और ड्रोन्स को हवा में ही ट्रैक करके नष्ट कर देता है। इसके मिसाइल हिस्से को ‘इंटरसेप्टर’ (Tamir Interceptor) कहा जाता है।

प्रश्न 2: क्या भारत इजरायल से पूरा आयरन डोम सिस्टम खरीद रहा है?

उत्तर: नहीं, भारत पूरा सिस्टम नहीं खरीद रहा है। इजरायल की रक्षा कंपनी राफेल भारत में इसके ‘मिसाइल इंटरसेप्टर’ के निर्माण के लिए फैक्टरी या प्रोडक्शन लाइन लगाने की संभावनाओं पर बात कर रही है, जिससे भारत इसका इंटरनेशनल मैन्युफैक्चरिंग हब बन सके।

प्रश्न 3: मिशन सुदर्शन चक्र क्या है?

उत्तर: मिशन सुदर्शन चक्र भारत का एक महत्वाकांक्षी रक्षा प्रोजेक्ट है, जिसके तहत 2035 तक भारत के आसमान को दुश्मनों के मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों से पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए एक आधुनिक, एकीकृत एयर डिफेंस कवच (Integrated Air Defense Shield) तैयार किया जा रहा है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और रक्षा विश्लेषकों द्वारा साझा की गई जानकारियों पर आधारित है। भारत सरकार या इजरायली रक्षा मंत्रालय की ओर से जब तक आधिकारिक तौर पर समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लग जाती, तब तक यह जानकारी संभावित रक्षा सहयोग और बातचीत के स्तर पर आधारित है।

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