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जिशु सेनगुप्ता और सोहिनी सरकार ने ‘भूलते पारबे ना’ के साथ ‘बोहरूपी- द गोल्डन डाकू’ में घोला रोमांस और संगीत का रंग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, सितम्बर, 2026: ‘बोहरूपी- द गोल्डन डाकू’ की हाई-ऑक्टेन दुनिया में एक खूबसूरत रोमांटिक ठहराव के रूप में ‘भूलते पारबे ना’, फिल्म का नया गाना अब रिलीज़ हो चुका है।

प्यार और जज़्बात को सामने लाने वाला यह मधुर गीत जिशु सेनगुप्ता को हारमोनियम बजाते हुए दिखाता है, जो गाने में एक गर्मजोशी और अंतरंग एहसास जोड़ता है। गाने की सादगी भरी रोमांटिक भावनाओं के साथ जिशु की मौजूदगी दर्शकों को फिल्म की एक्शन से भरपूर दुनिया के पीछे छिपे कोमल जज़्बातों की झलक देती है।

जिशु सेनगुप्ता ने साझा किया, “भूलते पारबे ना मेरे दिल के बेहद करीब है, क्योंकि यह ‘बोहरूपी- द गोल्डन डाकू’ की दुनिया का एक बिल्कुल अलग पहलू सामने लाता है। यह एक खूबसूरत रोमांटिक मेलोडी है और अरमान की आवाज़, अनुपम के संगीत और बोलों ने इसके जज़्बात को बेहद खूबसूरती से उभारा है। मुझे उम्मीद है कि दर्शक फिल्म के इस शांत और रोमांटिक पक्ष को भी उतना ही पसंद करेंगे, जितना हमें इसे बनाने में मज़ा आया।”

सोहिनी सरकार ने कहा, “भूलते पारबे ना ‘बोहरूपी- द गोल्डन डाकू’ के एक बेहद कोमल और भावुक पक्ष को खूबसूरती से सामने लाता है। इस गाने में एक बेहद निजी और आत्मीय एहसास है और मुझे लगता है कि यह झिमली और उसकी यात्रा में एक खूबसूरत नया आयाम जोड़ता है। इस गाने का हिस्सा बनना और फिल्म के इस खास पल को जीना मेरे लिए बेहद खास रहा। उम्मीद है कि दर्शक भी इसके जज़्बात और संगीत से उतना ही जुड़ेंगे, जितना हम जुड़े।”

नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी ने संयुक्त रूप से कहा, “बोहरूपी- द गोल्डन डाकू के साथ हमारा उद्देश्य एक ऐसी दुनिया बनाना था, जिसमें एक्शन, सस्पेंस और भव्यता के साथ गहरे मानवीय जज़्बात भी केंद्र में हों। ‘भूलते पारबे ना’ फिल्म की इसी भावनात्मक और रोमांटिक परत को सामने लाता है। जिशु दा का हारमोनियम बजाना गाने को एक खूबसूरत आत्मीयता देता है, वहीं अनुपम रॉय का संगीत और लेखन और अरमान की आवाज़ मिलकर एक परफेक्ट माहौल तैयार करते हैं। हमारे लिए यह ज़रूरी था कि फिल्म की कहानी में रोमांस स्वाभाविक लगे और हमें लगता है कि यह गाना उस एहसास को खूबसूरती से पेश करता है।”

फिल्म में जिशु सेनगुप्ता, शिबोप्रसाद मुखर्जी, कौशानी मुखर्जी, सोहिनी सरकार और प्रदीप भट्टाचार्य अहम् भूमिकाओं में हैं। शमिक चक्रवर्ती के अरेंजमेंट और प्रोग्रामिंग से सजा ‘भूलते पारबे ना’, फिल्म की दुर्गा पूजा 2026 रिलीज़ से पहले दर्शकों के मूड में एक खूबसूरत बदलाव लेकर आता है।

एक्शन, भव्यता और सस्पेंस से दर्शकों को रोमांचित करने के बाद ‘बोहरूपी- द गोल्डन डाकू’ अब यह साबित करते हुए संगीत और रोमांस की ओर रुख करता है कि इस पूजा, गोल्डन डाकू के कई रंग सामने आने बाकी हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।