लखनऊ. King George’s Medical University (KGMU) परिसर में मजारों को हटाने को लेकर चल रहा विवाद फरवरी 2026 में निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 9 फरवरी 2026 को पांच मजारों पर दूसरा नोटिस चस्पा कर संबंधित कमेटियों से 28 फरवरी तक साक्ष्य और भू-अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा है। प्रशासन का दावा है कि ये संरचनाएं अस्पताल की आपात सेवाओं में बाधा बन रही हैं, जबकि धार्मिक संगठन इसे ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा मामला बता रहे हैं।
क्या है विवाद की पृष्ठभूमि?
KGMU प्रशासन के अनुसार परिसर के विभिन्न हिस्सों—क्वीन मैरी अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग और ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक—के पास कुल 6 मजारें बनी हुई हैं।
- इन पर वैध भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है।
- एम्बुलेंस रूट और मरीजों की आवाजाही प्रभावित होने की बात कही गई है।
- प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत सार्वजनिक स्थानों से अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है।
फरवरी 2026 के ताजा घटनाक्रम
- दूसरा नोटिस (9 फरवरी): जनवरी में जारी पहले नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने के बाद पांच मजारों पर पुनः नोटिस लगाया गया।
- 28 फरवरी तक सुनवाई: मजार कमेटियों को रजिस्ट्रार के समक्ष दस्तावेज पेश करने का अवसर दिया गया है।
- एक कमेटी का जवाब: न्यू ऑर्थोपेडिक कैंपस स्थित एक मजार कमेटी ने दावा किया है कि संरचना 1947 से पहले की है। प्रशासन इस दावे की ऐतिहासिक व राजस्व अभिलेखों से जांच कर रहा है।
- संभावित सर्वे और मैपिंग: विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, परिसर का तकनीकी सर्वे और ट्रैफिक मूवमेंट मैपिंग कराई जा रही है ताकि इमरजेंसी रूट स्पष्ट किए जा सकें।
सुरक्षा और राजनीतिक हलचल
- परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
- अप्रैल 2025 में अतिक्रमण हटाने की कोशिश के दौरान पत्थरबाजी की घटनाएं हुई थीं, जिसके चलते इस बार प्रशासन सतर्क है।
- AIMIM सहित कुछ संगठनों ने इसे “धार्मिक विरासत पर चोट” बताते हुए विरोध की चेतावनी दी है।
मरीजों की सुविधा बनाम विरासत का सवाल
प्रशासन का तर्क है कि ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी ब्लॉक के आसपास अवरोध से गोल्डन आवर में इलाज प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, मजार कमेटियां कह रही हैं कि संरचनाएं मेडिकल कॉलेज बनने से पहले से मौजूद हैं और इन्हें हटाना सामाजिक सौहार्द पर असर डाल सकता है।
आगे क्या?
28 फरवरी 2026 की सुनवाई के बाद दस्तावेजों की जांच होगी।
- यदि दावे प्रमाणित होते हैं तो वैकल्पिक समाधान—जैसे सीमांकन या संरचना का पुनर्स्थापन—पर विचार हो सकता है।
- यदि रिकॉर्ड नहीं मिलते, तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज हो सकती है।
फिलहाल, KGMU मजार विवाद प्रशासनिक, कानूनी और राजनीतिक—तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रदेश सरकार और न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका भी अहम रह सकती है।
आधिकारिक संदर्भ के लिए: King George’s Medical University Official Website
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