ढाका. बांग्लादेश में कल, 12 फरवरी 2026 को 13वें आम चुनाव के लिए ऐतिहासिक मतदान होने जा रहा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने और उनके भारत निर्वासन के बाद यह देश का पहला राष्ट्रीय चुनाव है। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की देखरेख में आयोजित यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतांत्रिक भविष्य की दिशा तय करेगा।
दोहरी वोटिंग: संसदीय चुनाव और ‘जुलाई चार्टर’ जनमत संग्रह
इस बार का चुनाव केवल नेताओं को चुनने के लिए नहीं है। मतदाताओं को दो अलग-अलग मतपत्र (Ballots) दिए जाएंगे:
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सफेद मतपत्र: 299 संसदीय सीटों के लिए।
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गुलाबी मतपत्र: ‘जुलाई चार्टर’ जनमत संग्रह के लिए।
जुलाई चार्टर क्या है? यह एक व्यापक संवैधानिक सुधार प्रस्ताव है। यदि जनता ‘हां’ चुनती है, तो देश के संविधान में बड़े बदलाव होंगे, जिसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की 10 साल की सीमा, एक उच्च सदन (Upper House) का गठन और भविष्य के चुनावों के लिए केयरटेकर सरकार की स्थायी बहाली शामिल है।
प्रमुख दावेदार और राजनीतिक समीकरण
अवामी लीग पर प्रतिबंध लगने के कारण इस बार का चुनावी रण पूरी तरह बदल गया है:
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BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी): खालिदा जिया की पार्टी और उनके पुत्र तारिक रहमान को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
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जमात-ए-इस्लामी: युवा और ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर यह दल दूसरे बड़े दावेदार के रूप में उभरा है।
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NCP (नेशनल सिटीजन पार्टी): 2024 के छात्र आंदोलन के नेताओं द्वारा गठित यह पार्टी ‘नई राजनीति’ के वादे के साथ मैदान में है।
चुनाव से जुड़े अहम आंकड़े और सुरक्षा (At a Glance)
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मतदान का समय: सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक।
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कुल मतदाता: लगभग 12.77 करोड़।
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कुल सीटें: 300 (चुनाव 299 सीटों पर, शेरपुर-3 में उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान स्थगित)।
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सुरक्षा व्यवस्था: देश भर में 9.58 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात। पहली बार चुनाव की निगरानी के लिए UAVs, ड्रोन और बॉडी कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।
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प्रवासी मतदान: बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार प्रवासियों को पोस्टल बैलेट के जरिए वोट देने की सुविधा मिली है।
भारत और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
भारत के लिए यह चुनाव सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अवामी लीग की अनुपस्थिति में बनने वाली नई सरकार के साथ तीस्ता जल विवाद और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भविष्य की बातचीत टिकी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चुनाव शांतिपूर्ण रहे, तो बांग्लादेश में निवेश और आर्थिक स्थिरता की वापसी हो सकती है, जो दक्षिण एशिया के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा।
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