नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस की ‘विदेशी सेल’ (Foreigner Cell) इन दिनों एक्शन मोड में है। उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए एक ऐसे बांग्लादेशी दंपति को गिरफ्तार किया है, जो न केवल खुद अवैध रूप से भारत में रह रहा था, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा पार कराने और दिल्ली में बसाने का काला कारोबार भी कर रहा था।
मेट्रो स्टेशन के पास से हुई गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस की उत्तर-पश्चिम जिला उपायुक्त आकांक्षा यादव के नेतृत्व में विदेशी सेल की टीम लगातार अवैध प्रवासियों पर नजर रख रही थी। इसी कड़ी में गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने 9 मार्च को महेंद्र पार्क और जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन के पास जाल बिछाया। पुलिस ने यहाँ से विकाश उर्फ दिप्तो कुमार पाल (28) और उसकी पत्नी रूमा बेगम (27) को दबोच लिया।
सोशल मीडिया और प्रतिबंधित ऐप का जाल
पकड़े गए दंपति के पास से पुलिस ने दो स्मार्टफोन बरामद किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन फोन में ‘ईमो (imo) एप्लीकेशन’ इंस्टॉल थी, जो सुरक्षा कारणों से कई बार जांच के दायरे में रहती है। जांच में सामने आया कि:
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यह दंपति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए घुसपैठ के इच्छुक लोगों से संपर्क करता था।
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घुसपैठ की साजिश और रूट की जानकारी साझा करने के लिए प्रतिबंधित ऐप्स का इस्तेमाल किया जाता था।
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इनके पास से 6 अन्य बांग्लादेशी नागरिकों के संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं, जिन्हें ये भारत लाने की तैयारी में थे।
डिपोर्ट होने के बाद दोबारा भारत में एंट्री
इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि यह दंपति पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में माहिर है। पिछले साल देहरादून पुलिस ने इन्हें अवैध रूप से रहते हुए पकड़ा था और कानूनी प्रक्रिया के तहत बांग्लादेश डिपोर्ट (वापस भेजना) कर दिया था। लेकिन, कुछ ही महीनों के भीतर ये फिर से अवैध रास्तों से सीमा पार कर भारत में दाखिल हो गए और दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में अपना नेटवर्क दोबारा खड़ा कर लिया।
कैसे खुला राज?
हाल ही में दिल्ली पुलिस ने तीन बांग्लादेशी महिलाओं को अवैध रूप से रहते हुए पकड़ा था। कड़ाई से पूछताछ करने पर उन महिलाओं ने खुलासा किया कि उन्हें सीमा पार कराने और दिल्ली में रहने का ठिकाना दिलाने में विकाश और रूमा ने ही मदद की थी। इसके बाद पुलिस ने विकाश की इंटरनेट गतिविधियों पर तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) शुरू की और उसे पकड़ लिया।
मोटी रकम और फर्जी दस्तावेज
पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह सीमा पार कराने के बदले प्रति व्यक्ति मोटी रकम वसूलता था। गिरफ्तारी के वक्त आरोपितों ने खुद को भारतीय नागरिक बताने की कोशिश की और फर्जी आधार कार्ड व अन्य कागजात दिखाए, लेकिन गहन जांच में वे सभी जाली पाए गए।
आगे की कार्रवाई: सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता
दिल्ली पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि:
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सीमा पर वे कौन से ‘लूपहोल्स’ हैं जिनका फायदा उठाकर ये दंपति बार-बार भारत में घुस आता है?
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दिल्ली में इन्हें फर्जी दस्तावेज (आधार, वोटर आईडी) बनाने में कौन मदद कर रहा है?
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क्या इस सिंडिकेट का संबंध किसी अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से तो नहीं है?
फिलहाल, दोनों को एफआरआरओ (FRRO) के समक्ष पेश कर दिया गया है और उन्हें फिर से डिपोर्ट करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। दिल्ली पुलिस का यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है।
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