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अफगानिस्तान में आए 5.9 तीव्रता के भूकंप के झटके जम्मू-कश्मीर में भी किए गए महसूस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

जम्मू. अफगानिस्तान में आए 5.9 तीव्रता के भूकंप का असर जम्मू-कश्मीर में भी देखने को मिला। जम्मू-कश्मीर में भूकंप से लोगों में अफरातफरी मच गई और लोग घरों से बाहर निकल भागे। जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-तजाकिस्तान बॉर्डर पर था। भूकंप की गहराई धरती के नीचे 86 किमी पर थी। भूकंप से फिलहाल जानमाल के नुकसान की कोई जानकारी नहीं है। भूकंप के झटके दोपहर 12.17 पर महसूस किए गए।

भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर खुली जगह में आ गए। भूकंप का खौफ लोगों के चेहरे पर नजर आने लगा। अफगानिस्तान और पाकिस्तान से लेकर जम्मू-कश्मीर तक की धरती भूकंप के तेज झटके से हिल उठी है। पाकिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। बता दें कि इससे पहले भी इन इलाकों में बड़े भूकंप आ चुके हैं जिससे जानमाल का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था।

शनिवार को भी आया था घाटी में भूकंप

इससे पहले शनिवार (12 अप्रैल) को भी जम्मू कश्मीर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। शनिवार दोपहर करीब एक बजे मध्यम तीव्रता का भूकंप आया जिसका केंद्र पाकिस्तान में था। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.8 मापी गई थी। इस भूकंप का केंद्र पाकिस्तान में था और यह जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। हालांकि भूकंप के झटकों से जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ था।

2005 के भूकंप ने मचाई थी बड़ी तबाही

बता दें कि जम्मू-कश्मीर भूकंप के लिए बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यह भूकंप के सिस्मिक जोन 4 और 5 में आता है। यहां समय-समय पर छोटे-बड़े भूकंप आते रहे हैं। 2005 में कश्मीर में काफी बड़ा भूकंप आया था। 7.6 की तीव्रता वाले भूकंप ने घाटी में बड़ी तबाही मचाई थी। इस भूकंप में जम्मू-कश्मीर में कम से कम 1,350 लोग मारे गए और 6,266 घायल हुए थे। इस भूकंप का केंद्र पीओके स्थित मुजफ्फराबाद के पास था। पाकिस्तान में 87 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

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जम्मू-कश्मीर का डोडा, किश्तवाड़, भद्रवाह, और रियासी जैसा इलाका भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के कारण फॉल्ट लाइनों पर स्थित है। जम्मू-कश्मीर में 2.0 से 4.0 तीव्रता के छोटे भूकंप अक्सर आते रहते हैं। ये आमतौर पर नुकसान नहीं पहुंचाते। हाल के वर्षों में 4.0 से 5.9 तीव्रता के भूकंप बार-बार आए हैं, लेकिन इनसे बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय क्षेत्र में 8.0 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आ सकता है, जिसके लिए तैयारी जरूरी है।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।