मुंबई । मंगलवार, 11 अगस्त 2026
भारत की संसद ने 135 साल पुराने ब्रिटिश कालीन Bankers’ Books Evidence Act, 1891 को खत्म कर उसकी जगह Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 पारित कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए इस विधेयक को दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है।
डिजिटल इंडिया और फिनटेक (FinTech) क्रांति के इस दौर में, जब देश का अधिकांश लेनदेन कागजी बही-खातों से निकलकर मोबाइल बैंकिंग, UPI, इंटरनेट बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और क्लाउड सर्वर पर आ गया है, तब इस ऐतिहासिक कानून की अत्यधिक आवश्यकता थी।
पुराने और नए कानून में क्या बड़ा बदलाव आया है?
| विशेषता / पहलू | पुराना कानून (1891) | नया कानून (2026) |
| मूल आधार | कागजी रजिस्टर, लेजर और भौतिक बही-खाते | इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड आधारित रिकॉर्ड |
| डिजिटल साक्ष्य की स्थिति | स्पष्ट कानूनी ढांचे का अभाव, लंबी प्रक्रिया | प्राथमिक और वैध साक्ष्य के रूप में पूर्ण स्वीकार्यता |
| तकनीकी दायरा | केवल पारंपरिक बैंक एवं डाकघर | बैंक, फिनटेक कंपनियां, पेमेंट एग्रीगेटर्स और NBFCs |
| प्रमाणन (Certification) | भौतिक हस्ताक्षर और मुहर | डिजिटल हस्ताक्षर व डेटा इंटीग्रिटी सर्टिफिकेट |
अदालतों और न्यायिक व्यवस्था पर प्रभाव
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कागजी प्रतियों पर निर्भरता खत्म: अदालती मुकदमों में अब भारी-भरकम लेजर या कागजी प्रतियों को प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त हो गई है।
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बैंक अधिकारियों का समय बचेगा: बैंक अधिकारियों को गैर-आवश्यक मामलों में गवाह के रूप में बार-बार कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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तेज न्याय प्रक्रिया: डिजिटल डेटा की त्वरित उपलब्धता से वित्तीय धोखाधड़ी, बैंकिंग विवादों और सिविल मुकदमों का निपटारा तेजी से होगा।
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सख्त प्रमाणन मानक: डिजिटल रिकॉर्ड की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए धारा 7 के तहत यह देखा जाएगा कि कंप्यूटर सिस्टम के साथ कोई छेड़छाड़ या डेटा में अनधिकृत बदलाव न हुआ हो।
आम ग्राहकों और MSME सेक्टर के लिए क्या बदला?
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डिजिटल लेनदेन का भरोसा: UPI या इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े विवादों में अब डिजिटल रिसीप्ट और सर्वर लॉग्ज कोर्ट में मजबूत सबूत माने जाएंगे।
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व्यापारियों (MSMEs) के लिए सुगमता: छोटे और मध्यम उद्योगों का अधिकतर काम ऑनलाइन बिलिंग, GST और बैंकिंग पर चलता है। यह कानून उनके डिजिटल लेनदेन को पूर्ण कानूनी सुरक्षा देता है।
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डेटा गोपनीयता व सुरक्षा: नया कानून ग्राहकों की निजता और गोपनीयता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पारदर्शिता लाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 लागू हो गया है?
उत्तर: जी हाँ, संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति की सहमति और आधिकारिक गजट अधिसूचना द्वारा लागू करने की प्रक्रिया में है।
प्रश्न 2: क्या मेरा कोई भी स्क्रीनशॉट या डिजिटल रिकॉर्ड कोर्ट में अपने आप सबूत बन जाएगा?
उत्तर: नहीं, केवल स्क्रीनशॉट अंतिम सबूत नहीं होगा। कानून के तहत निर्धारित तकनीकी प्रक्रियाओं, प्रामाणिकता और बैंक द्वारा जारी डिजिटल प्रमाण पत्र (Digital Certificate) का होना आवश्यक है।
प्रश्न 3: यह कानून 1891 के पुराने कानून से कैसे अलग है?
उत्तर: 1891 का कानून ब्रिटिश काल का था जो केवल कागजी प्रतियों पर केंद्रित था। नया 2026 का कानून इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, क्लाउड और फिनटेक रिकॉर्ड्स को कानूनी साक्ष्य के रूप में पूर्ण मान्यता प्रदान करता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कानून या विधेयक के सटीक तकनीकी और कानूनी प्रावधानों के लिए भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक गजट (Official Gazette) अथवा PRS India की रिपोर्ट का अवलोकन करें।
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