कानपुर। शहर के प्रमुख चिकित्सा संस्थान जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर (हैलट) अस्पताल अब मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच सुविधाएं देने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने अपनी पैथोलॉजी लैब के लिए NABL (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज) मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस सर्टिफिकेशन के मिलने के बाद हैलट की पैथोलॉजी रिपोर्ट देश की किसी भी बड़ी निजी लैब के बराबर विश्वसनीय मानी जाएगी।
गुणवत्ता के लिए विशेषज्ञों की तैनाती
पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. लुबिना खान ने बताया कि लैब की कार्यप्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए एक क्वालिटी मैनेजर की नियुक्ति की गई है। क्वालिटी मैनेजर का मुख्य कार्य जांच मशीनों के कैलिब्रेशन, डेटा प्रबंधन और टेस्ट प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी करना है। विभाग का लक्ष्य जांचों में होने वाली मानवीय त्रुटियों को शून्य करना और रिपोर्टिंग सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है।
6 महीने का कड़ा परीक्षण
NABL के कड़े नियमों के अनुसार, किसी भी लैब को आवेदन करने से पहले कम से कम 6 महीने का निरंतर गुणवत्ता रिकॉर्ड दिखाना अनिवार्य होता है। वर्तमान में लैब इसी डेटा बेस को तैयार कर रही है। अगले छह महीनों तक मानकों का सख्ती से पालन करने के बाद औपचारिक रूप से आवेदन भेजा जाएगा, जिसके बाद दिल्ली से आने वाली विशेषज्ञों की टीम लैब का निरीक्षण करेगी।
मरीजों को होंगे ये बड़े लाभ:
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सटीक इलाज: रिपोर्ट की विश्वसनीयता बढ़ने से डॉक्टरों के लिए सटीक डायग्नोसिस और उपचार आसान होगा।
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आर्थिक बचत: मरीजों को अब महंगी जांचों के लिए निजी लैब के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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राष्ट्रीय मान्यता: लैब की रिपोर्ट को देशभर के अन्य अस्पतालों में भी उतनी ही मान्यता मिलेगी।
इस कदम से न केवल अस्पताल की साख में वृद्धि होगी, बल्कि कानपुर और आसपास के जिलों से आने वाले हजारों मरीजों को सरकारी खर्च पर विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
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