नई दिल्ली. भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाते हुए, रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने के मेगा प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस सौदे को वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को थामने और सरहदों पर सुरक्षा पुख्ता करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
स्क्वाड्रन की कमी को मिलेगा सहारा
भारतीय वायुसेना (IAF) वर्तमान में अपने सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले वायुसेना के पास अभी केवल 29 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। हाल ही में पुराने पड़ चुके MiG-21 बेड़े को रिटायर किया गया है, और जल्द ही मिराज 2000 व जगुआर जैसे विमान भी सेवा से बाहर होने वाले हैं। ऐसे में 114 नए राफेल जेट्स का बेड़ा वायुसेना की ‘कॉम्बैट पावर’ को फिर से पटरी पर लाएगा।
‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगा निर्माण
इस सौदे की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वदेशी कनेक्शन है। प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत:
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कुछ विमान फ्रांस से ‘फ्लाई-अवे’ (तैयार स्थिति) में आएंगे।
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शेष विमानों का निर्माण भारत में ही फ्रांसीसी कंपनी डासॉल्ट एविएशन और भारतीय साझेदार कंपनियों द्वारा किया जाएगा।
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इससे न केवल भारत को अत्याधुनिक तकनीक मिलेगी, बल्कि रक्षा निर्माण क्षेत्र में रोजगार के हजारों अवसर भी पैदा होंगे।
तेजस के साथ मिलकर बनाएंगे सुरक्षा कवच
जहाँ एक ओर स्वदेशी तेजस Mk-1A पुराने सोवियत विमानों की जगह ले रहा है, वहीं राफेल एक ‘गेम-चेंजर’ के रूप में लंबी दूरी की मारक क्षमता और आधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लैस होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल की संख्या बढ़ने से पड़ोसी देशों के साथ जारी तनाव के बीच भारत की स्थिति रणनीतिक रूप से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।
अगला कदम
शुरुआती मंजूरी के बाद अब भारत और फ्रांस के बीच वाणिज्यिक और तकनीकी बातचीत (Commercial & Technical Negotiations) शुरू होगी। इसमें विमानों की कीमत, तकनीक हस्तांतरण की सीमा और डिलीवरी की समय सीमा पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
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