कानपुर. कोडीन युक्त कफ सिरप की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए वाराणसी की सारनाथ पुलिस ने कानपुर में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने ड्रग तस्करी के मुख्य आरोपी और ‘अग्रवाल ब्रदर्स’ के मालिक विनोद अग्रवाल की 5.25 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों और बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है।
फर्जी बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना के अनुसार, विनोद अग्रवाल एक ‘सुपर स्टॉकिस्ट’ के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कंपनियों से भारी मात्रा में कफ सिरप खरीदता था और फिर एमके हेल्थकेयर (प्रयागराज) व पीडी फार्मा (वाराणसी) जैसी बी और सी लेवल की फर्जी फर्मों के नाम पर फर्जी बिलिंग करता था।
हैरानी की बात यह है कि इन फर्मों को एक भी सिरप की डिलीवरी नहीं दी गई। इसके बजाय, पूरे स्टॉक को अवैध रूप से पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी के लिए भेज दिया जाता था। तस्करी से अर्जित करोड़ों रुपये मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वापस अग्रवाल ब्रदर्स के खातों में पहुंच रहे थे।
फ्रीज की गई संपत्तियों का विवरण
पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 68F (अपराध से अर्जित संपत्ति) के तहत यह कार्रवाई की है। फ्रीज की गई संपत्तियों में आरोपी के साथ-साथ उसके परिजनों के नाम शामिल हैं:
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विनोद अग्रवाल: सिविल लाइंस स्थित गोपाला विहार में 2 प्लॉट और जाजमऊ में एक आवासीय संपत्ति।
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सविता अग्रवाल (पत्नी): बिरहाना रोड स्थित कमर्शियल संपत्ति।
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शिवम अग्रवाल (बेटे): देहली सुजानपुर स्थित आवासीय संपत्ति।
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बैंक खाता: एक खाते को भी फ्रीज किया गया है जिसमें 37 लाख रुपये जमा हैं।
फरारी के बाद हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले की शुरुआत 11 नवंबर 2025 को हुई थी, जब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कानपुर के बिरहाना रोड स्थित प्रतिष्ठान पर छापा मारा था। छापे के दौरान विनोद अग्रवाल फरार हो गया था और हरियाणा में पहचान छिपाकर रह रहा था। लंबी तलाश के बाद 25 जनवरी 2026 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
वर्तमान स्थिति:
आरोपी फिलहाल पुलिस रिमांड पर है। पुलिस अब उन अन्य लोगों की तलाश कर रही है जो इस सिंडिकेट में शामिल थे और बॉर्डर पार दवाओं की सप्लाई में मदद कर रहे थे।
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