कानपुर. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और प्रशासन के दावों को ठेंगा दिखाते हुए शहर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा मासूमों और राहगीरों के लिए काल बन रहा है। ताजा मामला रेलबाजार थाना क्षेत्र के फेथफुलगंज पुल का है, जहां एक बाइक सवार युवक इस जानलेवा धागे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
मौत को छूकर निकले सुरेश, सिर में आए 15 टांके
खपरा मोहाल (कैंट) निवासी सुरेश विश्वकर्मा पोखरपुरवा स्थित पेप्सी कंपनी में सेल्समैन के पद पर कार्यरत हैं। मंगलवार शाम जब वह ड्यूटी के बाद बाइक से घर लौट रहे थे, तभी फेथफुलगंज पुल पर अचानक उनके गले और चेहरे के पास चाइनीज मांझा फंस गया। हेलमेट पहने होने के कारण उनकी गर्दन तो बच गई, लेकिन मांझे के खिंचाव से वह अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर पड़े।
राहगीरों ने आनन-फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां उनके सिर पर 15 टांके लगाने पड़े। सुरेश का कहना है कि अगर उन्होंने हेलमेट और जैकेट न पहनी होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
पुलिस का रवैया: “अज्ञात” के नाम पर टालमटोल
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब पीड़ित फेथफुलगंज चौकी पहुंचे, तो वहां मौजूद सिपाही ने कार्रवाई के बजाय उन्हें यह कहकर टरका दिया कि “अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट लिखकर क्या फायदा।” वहीं, थाना प्रभारी जितेंद्र प्रताप सिंह चौहान ने मामले की जानकारी से इनकार करते हुए तहरीर मिलने पर कार्रवाई की बात कही है।
जनता खुद कर रही सुरक्षा का इंतजाम
प्रशासन की लापरवाही से तंग आकर अब लोग अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही रास्ते निकाल रहे हैं। घायल सुरेश विश्वकर्मा ने अपनी बाइक के आगे लोहे का सेफ्टी ग्लास स्टैंड लगवाया है, ताकि मांझा सीधे उनके शरीर के संपर्क में न आए। उन्होंने अन्य शहरवासियों से भी अपील की है कि वे अपनी जान बचाने के लिए बाइक पर सुरक्षा गार्ड जरूर लगवाएं।
शहर के अन्य हिस्सों में भी दहशत
चाइनीज मांझे का कहर केवल रेलबाजार तक सीमित नहीं है। हाल ही में:
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माल रोड: जाजमऊ निवासी रवि चौरसिया और उनके दोस्त नदीम मांझे की चपेट में आए, जिसमें नदीम की उंगली कट गई।
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अन्य क्षेत्र: चमनगंज, बेकनगंज और घनी आबादी वाले इलाकों में भी धड़ल्ले से इसकी बिक्री और इस्तेमाल जारी है।
बड़ा सवाल: जब मुख्यमंत्री की ओर से इस जानलेवा मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध है, तो आखिर किसकी शह पर बाजार में यह मौत का धागा बिक रहा है? क्या पुलिस और नगर निगम केवल कागजों पर अभियान चला रहे हैं?
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