सुलतानपुर। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में हैं। सुलतानपुर की एमपी-एमएलए (MP-MLA) विशेष अदालत में चल रहे मानहानि के एक पुराने मामले में गुरुवार को उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब परिवादी पक्ष ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल (Voice Sample) की जांच कराने की मांग रख दी। इस अर्जी ने मामले की दिशा बदल दी है और अब सबकी निगाहें 23 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
क्या है ताजा विवाद? क्यों मांगी गई वॉयस रिकॉर्डिंग?
भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्र की ओर से उनके अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल की है। इस अर्जी में मांग की गई है कि:
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राहुल गांधी की आवाज का एक सैंपल पेन ड्राइव के माध्यम से कोर्ट में पेश किया जाए।
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इस सैंपल का मिलान अदालत में पहले से मौजूद घटना की वीडियो सीडी/कैसेट से कराया जाए।
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इस पूरी प्रक्रिया की पुष्टि के लिए इसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा जाए।
मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने इस अर्जी पर राहुल गांधी के वकीलों से आपत्ति (Objection) मांगी है। राहुल के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने साफ किया है कि वे इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे, जिसके बाद ही कोर्ट जांच का आदेश देने पर फैसला करेगी।
2018 का वो बयान, जो आज भी बना है गले की फांस
यह पूरा मामला करीब 8 साल पुराना है। 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। आरोप है कि वहां उन्होंने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ “आपत्तिजनक टिप्पणी” की थी।
आरोप का सार: शिकायतकर्ता विजय मिश्र का कहना है कि राहुल गांधी ने अमित शाह को “हत्यारा” कहकर संबोधित किया था, जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाओं को ठेस पहुंची। इसी के आधार पर 4 अगस्त 2018 को सुलतानपुर में मानहानि का केस दर्ज कराया गया था।
अब तक की कानूनी कार्रवाई: एक नजर में
राहुल गांधी इस मामले में पहले भी कई बार कानूनी प्रक्रियाओं से गुजर चुके हैं:
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नवंबर 2023: कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर राहुल गांधी को विचारण (Trial) के लिए तलब किया।
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फरवरी 2024: राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान समय निकालकर सुलतानपुर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और उन्हें जमानत मिल गई।
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बयान दर्ज: राहुल गांधी का बयान अदालत में पहले ही दर्ज किया जा चुका है, जिसमें उन्होंने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था।
| महत्वपूर्ण तथ्य | विवरण |
| शिकायतकर्ता | विजय मिश्र (पूर्व अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक) |
| अगली सुनवाई की तिथि | 23 मार्च, 2026 |
| धाराएं | आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) |
| मुख्य मुद्दा | वॉयस सैंपल का FSL मिलान |
राहुल गांधी मानहानि केस की पूरी हिस्ट्री
राहुल गांधी के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती?
अगर अदालत वॉयस सैंपल के मिलान की अनुमति दे देती है, तो यह मामला वैज्ञानिक साक्ष्यों (Forensic Evidence) के दायरे में आ जाएगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि FSL रिपोर्ट में आवाज की पुष्टि हो जाती है, तो बचाव पक्ष के लिए बयान से मुकर पाना मुश्किल होगा। हालांकि, राहुल गांधी की टीम इसे तकनीकी आधार पर चुनौती देने की तैयारी में है।
हाल के वर्षों में राहुल गांधी को सूरत की अदालत से भी मानहानि मामले में सजा मिल चुकी है (जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया था)। ऐसे में सुलतानपुर का यह मामला उनकी राजनीतिक छवि और चुनावी व्यस्तताओं के बीच एक बड़ी सिरदर्दी साबित हो सकता है।
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