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देगंगा विवाद: 100 बीघे के आलीशान बंगले में महिलाओं पर जुल्म ढाने वाला रबीउल इस्लाम सलाखों के पीछे

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कोलकाता । शुक्रवार, 12 जून 2026

पश्चिम बंगाल में संदेशखाली के मुख्य आरोपी शेख शाहजहां का खौफनाक अध्याय अभी लोगों के जेहन से पूरी तरह उतरा भी नहीं था कि उत्तर 24 परगना जिले के देगंगा (Deganga) इलाके से एक और ‘शाहजहां’ का काला साम्राज्य उजागर हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रभावशाली स्थानीय नेता और देगंगा पंचायत समिति के सदस्य रबीउल इस्लाम (Rabiul Islam) पर महिलाओं के साथ गंभीर उत्पीड़न, जबरन जमीन हड़पने और अकूत अवैध संपत्ति बनाने के रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगे हैं।

गंभीर आरोपों के सामने आने और पुलिसिया शिकंजा कसने के बाद आरोपी नेता राज्य छोड़कर पड़ोसी देश बांग्लादेश भागने की फिराक में था, जिसे मुस्तैद सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पर दबोच लिया है। आइए जानते हैं फर्श से अर्श तक पहुंचे इस नेता के जुल्म की पूरी दास्तां और इस मामले से जुड़े कानूनी व राजनीतिक तथ्य।

100 बीघे का वो आलीशान ‘गार्डन हाउस’ और महिलाओं का उत्पीड़न

स्थानीय निवासियों और पीड़ितों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के अनुसार, देगंगा पंचायत समिति में वन एवं भूमि विभाग के अधीक्षक रहे रबीउल इस्लाम ने इलाके में अपने रसूख के दम पर आतंक फैला रखा था। उसका करीब 100 बीघा जमीन पर फैला एक विशालकाय और बेहद आलीशान गार्डन हाउस है।

आरोप है कि रबीउल इस्लाम रात के अंधेरे में गरीब और लाचार ग्रामीण महिलाओं को इस गार्डन हाउस में ‘मछली फ्राई करने’ या खाना बनाने के बहाने बुलवाता था। यह कोई सामान्य मजदूरी या दावत नहीं, बल्कि महिलाओं को फंसाने का एक घिनौना जाल था। वहां पहुंचने के बाद महिलाओं को बंधक बनाकर उन पर अमानवीय और घृणास्पद अत्याचार किए जाते थे। रबीउल और उसके गुर्गों का खौफ इतना ज्यादा था कि कोई भी पीड़ित महिला या उसका परिवार बदनामी और जान के डर से पुलिस के पास जाने या जुबान खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।

2011 से पहले दिहाड़ी मजदूर, अब 10 करोड़ की संपत्ति का मालिक

रबीउल इस्लाम के आर्थिक उदय की कहानी जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही उसके कारनामों की परतें खोलने वाली है। साल 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन से पहले तक रबीउल एक बेहद साधारण दिहाड़ी मजदूर था, जो दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करता था।

लेकिन सत्ताधारी दल के स्थानीय गलियारों में अपनी पैठ मजबूत करने के बाद उसकी किस्मत का सितारा बेहद तेजी से चमका:

  • राजनीतिक पद: वह देखते ही देखते देगंगा पंचायत समिति के वन एवं भूमि विभाग का शक्तिशाली सर्वेसर्वा बन बैठा।

  • सरकारी धन का दुरुपयोग: जांच एजेंसियों के अनुसार, रबीउल पर आरोप है कि उसने विभिन्न सरकारी विकास परियोजनाओं के नाम पर आए फंड, सरकारी लकड़ियों और पेड़ों को अवैध रूप से बेचकर या डाइवर्ट करके अपने निजी गार्डन हाउस को सजाने-संवारने में खर्च किया।

  • करोड़ों का साम्राज्य: आज की तारीख में देगंगा में मौजूद उसके इस आलीशान साम्राज्य और बेनामी संपत्तियों की कुल कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।

बांग्लादेश भागने की फिराक में था आरोपी, बसिरहाट बॉर्डर पर दबोचा गया

लंबे समय तक रबीउल ने अपने राजनीतिक रसूख और स्थानीय पुलिस के कथित संरक्षण के दम पर हर कानून को ठेंगा दिखाया। हालांकि, हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों, संदेशखाली मामले के बाद अदालतों की सख्ती और स्थानीय जनता के भारी आक्रोश के कारण जब पुलिस पर दबाव बढ़ा, तो रबीउल का सुरक्षा कवच पूरी तरह टूट गया।

अपनी निश्चित गिरफ्तारी को भांपते हुए आरोपी नेता अंडरग्राउंड हो गया। उसने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उत्तर 24 परगना के बसिरहाट (Basirhat) अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के रास्ते अवैध तरीके से सीमा पार कर बांग्लादेश भागने की पूरी योजना बना ली थी। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की मुस्तैद टीम ने उसके इस मंसूबे पर पानी फेरते हुए उसे बॉर्डर के पास से रंगे हाथों दबोच लिया।

आवश्यक सुधार और फैक्ट-चेक (Fact-Check & Legal Reality)

इस पूरे मामले को गहराई से समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है:

  1. चुनावी हिंसा और फिरौती के पुराने मामले: स्थानीय रिकॉर्ड के अनुसार, रबीउल इस्लाम का नाम केवल महिला उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा (Post-Poll Violence), विपक्षी दल (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के घरों में तोड़फोड़ करने और इलाके में बड़े पैमाने पर ‘तोलाबाजी’ (जबरन वसूली/Extortion) करने के मामलों में भी सामने आ चुका है।

  2. जांच का दायरा: फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत (सलाखों के पीछे) में है। पश्चिम बंगाल पुलिस और राज्य की अन्य जांच एजेंसियां उसकी बेहिसाब संपत्तियों की परतों को खोलने और यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल थे।

इस संवेदनशील मामले की पल-पल की अपडेट, कोर्ट की टिप्पणियों और अन्य ग्राउंड रिपोर्ट्स को विस्तार से पढ़ने के लिए आप matribhumisamachar.com पर जाकर संबंधित समाचार अनुभाग को देख सकते हैं।

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