भोपाल । शुक्रवार, 12 जून 2026
मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी (IAS) और चर्चित लेखक नियाज़ खान एक बार फिर अपनी तीखी और बेहद विवादित टिप्पणी के कारण देश की सुर्खियों में आ गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर साझा किए गए उनके हालिया पोस्ट ने देश में जनसंख्या नियंत्रण और मानवाधिकारों को लेकर एक नई और संवेदनशील बहस छेड़ दी है। नियाज़ खान ने देश की लगभग 1.5 अरब (डेढ़ अरब) की आबादी को भारत के विकास के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा यानी ‘नासूर’ करार दिया है।
आबादी को बताया ‘नासूर’, आपातकाल जैसे दौर की वकालत
नियाज़ खान ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि भारत की बढ़ती हुई आबादी अब देश के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी है। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए बेहद कड़े कदम उठाने की वकालत की। उन्होंने लिखा:
“देश की डेढ़ अरब आबादी अब नासूर बन चुकी है। अब समय आ गया है कि लोगों की जबरदस्ती नसबंदी कराने पर विचार किया जाए। लोग खुद नसबंदी कराएं या सरकार इसे अनिवार्य बनाए।”
इतना ही नहीं, पूर्व नौकरशाह ने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय को निशाने पर लेते हुए आगे लिखा कि मुस्लिम समुदाय में बच्चों की संख्या अधिक होती है, इसलिए वहां इस नियम को और अधिक कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि अगर समय रहते ऐसा नहीं किया गया, तो भारत का भविष्य पूरी तरह से अंधकारमय हो जाएगा।
पहले भी उनके बयानों पर हुआ है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब नियाज़ खान ने इस तरह का तीखा बयान दिया है। प्रशासनिक सेवा में रहने के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद भी वे अपनी किताबों और सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर विवादों में रहे हैं। इससे पहले वे मुस्लिम समुदाय को आधुनिक बनने, शाकाहार अपनाने, पारंपरिक व्यवसायों को बदलने और अपने मूल भारतीय इतिहास से जुड़ने जैसी सलाह देकर भी चर्चा बटोर चुके हैं। हालांकि, इस बार सीधे “जबरन नसबंदी” और “नासूर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने के कारण उन्हें कानूनी और सामाजिक स्तर पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
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