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ज्ञानवापी प्रकरण: जनवरी और फरवरी 2026 में अदालती सुनवाई का ‘सुपर शेड्यूल’, वजूखाने के सर्वे पर टिकी नजरें

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. ज्ञानवापी परिसर से जुड़े विवादों के समाधान के लिए कानूनी कार्यवाही अब अपने निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही है। वाराणसी की स्थानीय अदालत से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक, अगले कुछ सप्ताह इस मामले के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। न्यायालयों ने जनवरी और फरवरी 2026 के लिए सुनवाई की महत्वपूर्ण तिथियां निर्धारित कर दी हैं।

17 जनवरी: वाराणसी जिला अदालत में अहम सुनवाई

आगामी 17 जनवरी 2026 को वाराणसी की स्थानीय अदालत में दो महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुनवाई होगी। ये मामले मुख्य रूप से परिसर के विभिन्न हिस्सों पर दावों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से संबंधित हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस दिन कोर्ट परिसर के प्रबंधन और वहां जारी धार्मिक गतिविधियों से जुड़े कुछ बड़े निर्देश दे सकता है।

27 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिकी सबकी निगाहें

हाईकोर्ट और जिला अदालत की कार्यवाही के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 27 जनवरी 2026 की तारीख है। इस दिन देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) में वजूखाने से जुड़े एक विशेष विषय पर सुनवाई होनी है। इस सुनवाई का परिणाम अन्य सभी निचली अदालतों की कार्यवाही के लिए एक दिशा-निर्देश साबित होगा।

3 फरवरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट में वजूखाने के सर्वे पर फैसला संभव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 फरवरी 2026 को वजूखाने के वैज्ञानिक सर्वेक्षण (ASI सर्वे) की मांग वाली याचिका पर सुनवाई तय की है।

  • मुख्य याचिका: यह याचिका राखी सिंह द्वारा दायर की गई है।

  • मांग: याचिकाकर्ता ने मांग की है कि वजूखाने के उस क्षेत्र का भी एएसआई सर्वे कराया जाए जो फिलहाल सील नहीं है (कथित शिवलिंग क्षेत्र को छोड़कर)।

  • कोर्ट का रुख: हाईकोर्ट ने इस सुनवाई को 3 फरवरी तक के लिए इसलिए टाला है ताकि 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई की स्थिति स्पष्ट हो सके।

सुरक्षा और वजूखाने की सील को लेकर सतर्कता

अदालती कार्यवाहियों के बीच, ज्ञानवापी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और न्यायालय के बीच निरंतर संवाद जारी है। विशेष रूप से वजूखाने की सील बदलने और वहां की सुरक्षा कड़ी करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान परिसर की संवेदनशीलता और साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।