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लोहड़ी 2026 : जानें पूजा का सही समय और देश भर में इसे मनाने के अनोखे तरीके

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चंडीगढ़. लोहड़ी उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा का एक प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व शीत लहर के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। आइए, लोहड़ी के विभिन्न पहलुओं पर एक विस्तृत नज़र डालते हैं:

1. लोहड़ी का शुभ मुहूर्त (2026)

लोहड़ी प्रतिवर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाई जाती है। वर्ष 2026 में लोहड़ी की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

  • दिनांक: 13 जनवरी, 2026 (मंगलवार)

  • लोहड़ी संक्रांति का क्षण: रात 09:02 बजे

  • पूजा का उत्तम समय: शाम 05:45 बजे से रात 08:30 बजे के बीच (स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार)

इस दिन शाम को सूर्यास्त के बाद पवित्र अग्नि (बोनफायर) जलाई जाती है, जिसमें तिल, गुड़ और रेवड़ी अर्पित की जाती है।

2. धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

लोहड़ी का धार्मिक महत्व गहरा है और यह कई कथाओं से जुड़ा हुआ है:

  • अग्नि देव की उपासना: हिंदू धर्म में अग्नि को देवताओं का मुख माना गया है। लोहड़ी पर अग्नि जलाकर हम सूर्य देव और अग्नि देव का आभार व्यक्त करते हैं कि उनकी कृपा से फसल अच्छी हुई और ठंड कम हुई।

  • सती और दक्ष की कथा: कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व देवी सती के त्याग की याद में मनाया जाता है। लोग अग्नि में आहुति देकर अपने भीतर की बुराइयों को भस्म करने का संकल्प लेते हैं।

  • दुल्ला भट्टी की कहानी: ऐतिहासिक रूप से लोहड़ी ‘दुल्ला भट्टी’ से जुड़ी है, जिन्हें ‘पंजाब का रॉबिन हुड’ कहा जाता है। उन्होंने मुगल काल में हिंदू लड़कियों को गुलामी से बचाया था और उनकी शादियां करवाई थीं। आज भी लोहड़ी के गीतों में उनका नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है।

3. सांस्कृतिक महत्व

लोहड़ी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है:

  • नई शुरुआत: जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा पैदा हुआ हो, वहां पहली लोहड़ी (महान लोहड़ी) बहुत धूमधाम से मनाई जाती है।

  • फसल उत्सव: यह किसानों के लिए खुशी का समय होता है क्योंकि रबी की फसल (विशेषकर गेहूं और सरसों) लहलहा रही होती है।

  • प्रकृति का आभार: यह प्रकृति के बदलते चक्र का उत्सव है, जहां हम छोटे होते दिनों के अंत और बड़े होते दिनों का स्वागत करते हैं।

4. भारत के विभिन्न हिस्सों में मनाने के तरीके

यद्यपि लोहड़ी का मुख्य केंद्र उत्तर भारत है, लेकिन इसके विभिन्न रंग पूरे देश में देखने को मिलते हैं:

क्षेत्र मुख्य विशेषता
पंजाब और हरियाणा भांगड़ा और गिद्दा, ‘सुंदर मुंदरिये’ गीत गाना, मक्के की रोटी और सरसों का साग।
दिल्ली और हिमाचल दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ बड़ी अग्नि जलाना और रेवड़ी-मूंगफली का वितरण।
जम्मू (डोगरा संस्कृति) यहां इसे ‘छज्जा’ नाच के साथ मनाया जाता है, जहां युवक रंग-बिरंगे कागज से बने छज्जे लेकर नृत्य करते हैं।
दक्षिण भारत (पोंगल) तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है, जो फसल कटाई का 4 दिवसीय उत्सव है।
गुजरात (उत्तरायण) यहां लोहड़ी के समय पतंगबाजी का विशेष महत्व होता है।

5. उत्सव के विशेष व्यंजन

लोहड़ी का स्वाद इसके पारंपरिक व्यंजनों के बिना अधूरा है:

  • तिल और गुड़: तिल की गजक, रेवड़ी और तिल के लड्डू।

  • मूंगफली: भुनी हुई मूंगफली अग्नि में भी डाली जाती है और प्रसाद के रूप में भी खाई जाती है।

  • सरसों का साग और मक्के की रोटी: यह पंजाब का पारंपरिक मुख्य भोजन है जो इस दिन अनिवार्य रूप से बनता है।

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