नई दिल्ली. भारतीय सेना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भारत की सीमाओं की ओर उठने वाली हर टेढ़ी आंख का अंजाम बुरा होगा। सेना दिवस (15 जनवरी) से पूर्व आयोजित अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और सीमा पार से जारी छद्म युद्ध पर कड़ा प्रहार किया।
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
सेना प्रमुख ने खुलासा किया कि भारतीय सेना ने पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर और नियंत्रण रेखा (LoC) के पास एक बेहद गोपनीय और सटीक ऑपरेशन चलाया, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम दिया गया।
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बड़ी सफलता: इस ऑपरेशन के तहत सेना ने घुसपैठ की कोशिश कर रहे और लॉन्च पैड्स पर मौजूद लगभग 100 आतंकियों और पाक समर्थित घुसपैठियों को ढेर किया है।
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रणनीति: जनरल द्विवेदी ने बताया कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से ‘तथ्य आधारित खुफिया जानकारी’ (Intelligence-based) पर केंद्रित था, जिसमें ड्रोन तकनीक और सटीक हवाई हमलों का भी उपयोग किया गया।
पाकिस्तान और चीन को दो-टूक चेतावनी
प्रेस वार्ता के दौरान जनरल द्विवेदी का रुख काफी सख्त नजर आया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना पड़ोसी देशों को उनकी औकात याद दिलाई:
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पड़ोसी (पाकिस्तान) को संदेश: सेना प्रमुख ने कहा, “अगर सीमा पार से आतंक की फैक्ट्री चालू रहेगी, तो हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कई विकल्प हमेशा तैयार रहेंगे। हम अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि निवारक (Preventive) कार्रवाई पर यकीन रखते हैं।”
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ड्रैगन (चीन) पर रुख: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सेना “पूरी तरह से सतर्क” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे के विकास और सैनिकों की तैनाती के मामले में भारत अब पीछे नहीं है।
स्वदेशी तकनीक पर जोर
जनरल ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल किए गए अधिकांश हथियार और निगरानी उपकरण ‘मेड इन इंडिया’ थे। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर सेना’ के विजन को दोहराते हुए कहा कि भविष्य के युद्ध तकनीक से जीते जाएंगे, और भारतीय सेना इसमें अग्रणी बन रही है।
मुख्य बिंदु जो पाठकों को आकर्षित करेंगे:
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100 आतंकियों का सफाया: एक बड़ा आंकड़ा जो सुरक्षा की भावना पैदा करता है।
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आधुनिक तकनीक: सेना का डिजिटलीकरण और स्वदेशी हथियारों का प्रभाव।
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दृढ़ नेतृत्व: जनरल द्विवेदी का निर्भीक और स्पष्ट बयान।
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