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भारत का व्यापार घाटा 59% बढ़कर $30.43 अरब पहुंचा, लेकिन सर्विस सेक्टर की लंबी छलांग से अर्थव्यवस्था मजबूत

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भारत का विदेशी व्यापार और सर्विस सेक्टर ग्रोथ ग्राफिक चार्ट

मुंबई । सोमवार, 13 जुलाई 2026

वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच भारत के विदेशी व्यापार से जुड़े जून महीने के आंकड़े सामने आ गए हैं। इस साल जून में भारत का व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) सालाना आधार पर 59 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के साथ 30.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी महीने में यह घाटा 19.10 अरब डॉलर था।

रॉयटर्स के पोल में अर्थशास्त्रियों ने इस घाटे के 26.63 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े इस अनुमान से अधिक रहे हैं। वहीं, इससे पिछले महीने यानी मई में यह घाटा 28.21 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। हालांकि, व्यापार घाटे में इस बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतक बेहद मजबूत नजर आ रहे हैं, जिसमें सर्विस सेक्टर का शानदार प्रदर्शन और वैश्विक स्तर पर होने वाली आगामी व्यापार डील्स शामिल हैं।

आयात-निर्यात के ताजा आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में भारत का वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) अप्रैल के 45.2 अरब डॉलर से घटकर 40.41 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। वहीं, इस दौरान आयात (इम्पोर्ट) भी 73.41 अरब डॉलर के मुकाबले कम होकर 70.84 अरब डॉलर रहा।

वस्तुओं के व्यापार में भले ही घाटा बढ़ा हो, लेकिन देश के सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन कर अर्थव्यवस्था को संभाला है। वाणिज्य मंत्रालय के आकलन के मुताबिक, जून में सर्विस एक्सपोर्ट 33.03 अरब डॉलर और आयात 17.92 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। इस तरह सेवा क्षेत्र में भारत को 15.11 अरब डॉलर का बड़ा व्यापार अधिशेष (सरप्लस) हासिल हुआ है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाला संकेत है।

अमेरिका और ब्रिटेन के साथ जल्द होंगे ऐतिहासिक व्यापार समझौते

देश का यह व्यापारिक आंकड़ा ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत सरकार वैश्विक शक्तियों के साथ बेहतर व्यापार समझौतों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस पर बड़ा अपडेट देते हुए कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और इसमें कोई बड़ी चुनौती नजर नहीं आती। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे से जुड़ा समझौता पूरी तरह तैयार है और उचित समय पर इस पर दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके साथ ही ऊर्जा आयात सहित दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, व्यापारिक मोर्चे पर भारत के लिए एक और बड़ी खुशखबरी है। ब्रिटेन (यूके) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इसी महीने लागू होने वाला है। साथ ही, यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी अगले साल की शुरुआत तक द्विपक्षीय व्यापार समझौता होने की पूरी उम्मीद है।

तिमाही निर्यात में बढ़ोतरी से मिला सहारा

व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ते निर्यात और नए व्यापारिक समझौतों ने वैश्विक स्तर पर भारत का पक्ष काफी मजबूत किया है। ईरान युद्ध और लाल सागर संकट जैसी वैश्विक बाधाओं के बावजूद, अप्रैल-जून तिमाही में भारत का कुल वस्तु निर्यात पिछले साल की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत बढ़ा है। इस वृद्धि में महंगे पेट्रोलियम शिपमेंट का बड़ा योगदान रहा।

वैकल्पिक समुद्री रास्तों के इस्तेमाल से खाड़ी देशों (Gulf Countries) को होने वाला भारत का निर्यात भी युद्ध पूर्व स्तर पर लौट आया है। मार्च में यह 2.62 अरब डॉलर था, जो मई में बढ़कर 5.3 अरब डॉलर हो गया। वहीं, अप्रैल और मई के दौरान अमेरिका को किया गया निर्यात भी बढ़कर 17.29 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।

विकास दर का अनुमान बढ़कर हुआ 6.8 प्रतिशत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बेहद सकारात्मक रिपोर्ट सामने आ रही हैं। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के अर्थशास्त्री सांतनु सेनगुप्ता की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते से कच्चे तेल की कीमतें नरम हुई हैं, जिसका सीधा फायदा भारतीय बाजारों को मिला है।

बैंक ने भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और डोमेस्टिक डिमांड को देखते हुए साल 2026 के लिए भारत की विकास दर (GDP Growth Rate) का अनुमान बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही देश में मुद्रास्फीति (महंगाई) और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) के अनुमान को भी घटाया गया है। इसके अलावा, वैश्विक बाजार में रुपये में आई मामूली कमजोरी ने भारतीय निर्यातकों को अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है, जिससे भारत के पास अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता में अपनी शर्तें मजबूती से रखने की पर्याप्त गुंजाइश है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. जून में भारत का व्यापार घाटा कितना रहा?

Ans: जून में भारत का व्यापार घाटा सालाना आधार पर 59% बढ़कर 30.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी महीने में 19.10 अरब डॉलर था।

Q2. सर्विस सेक्टर में भारत को कितना व्यापार अधिशेष (Surplus) मिला है?

Ans: वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, जून में सेवा क्षेत्र (Service Sector) में भारत को 15.11 अरब डॉलर का बड़ा व्यापार अधिशेष हासिल हुआ है।

Q3. गोल्डमैन सैक्स ने साल 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का क्या अनुमान लगाया है?

Ans: गोल्डमैन सैक्स ने भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को देखते हुए वर्ष 2026 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है।

Q4. भारत के कौन से नए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) होने वाले हैं?

Ans: ब्रिटेन (यूके) के साथ मुक्त व्यापार समझौता इसी महीने लागू होने की उम्मीद है, जबकि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता तैयार है और यूरोपीय संघ (EU) के साथ अगले साल की शुरुआत तक समझौता हो सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दिए गए व्यापारिक और आर्थिक आंकड़े सरकारी बयानों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की रिपोर्टों पर आधारित हैं। निवेश या वित्तीय निर्णय लेने से पहले बाजार विशेषज्ञों से सलाह अवश्य लें।

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