बैंकाक. थाईलैंड के मध्य क्षेत्र में एक निर्माण स्थल पर एक विशाल क्रेन के चलती ट्रेन पर गिरने से एक भीषण हादसा हुआ। इस हृदयविदारक घटना में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने देश में निर्माण सुरक्षा और रेलवे संचालन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण
यह दुर्घटना तब हुई जब एक यात्री ट्रेन अपने निर्धारित मार्ग पर जा रही थी। रेल की पटरियों के ठीक ऊपर या बगल में चल रहे एक ओवरपास (फ्लाईओवर) निर्माण कार्य के दौरान एक भारी-भरकम क्रेन अचानक अपना संतुलन खो बैठी।
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प्रभाव: क्रेन का विशाल लोहे का ढांचा सीधे ट्रेन के बीच के डिब्बों पर गिरा।
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क्षति: क्रेन के वजन और गिरने के वेग के कारण ट्रेन के दो से तीन डिब्बे पूरी तरह पिचक गए। यात्री अंदर ही फंस गए, जिससे बचाव कार्य में काफी कठिनाई आई।
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तत्काल प्रतिक्रिया: स्थानीय आपातकालीन सेवाओं और आपदा राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए हाइड्रोलिक कटर और भारी मशीनों का उपयोग किया।
हताहतों की स्थिति
अधिकारियों के अनुसार, मृतकों की संख्या 22 तक पहुंच गई है। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। मृतकों में ज्यादातर स्थानीय यात्री और कुछ निर्माण कर्मी शामिल बताए जा रहे हैं।
संभावित कारण और जांच
प्रारंभिक रिपोर्टों और चश्मदीदों के अनुसार, हादसे के पीछे निम्नलिखित संभावित कारण हो सकते हैं:
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तकनीकी विफलता: क्रेन के केबल या सपोर्ट सिस्टम में अचानक आई खराबी।
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मानवीय चूक: निर्माण के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना, जैसे ट्रेन के गुजरने के समय भारी काम को न रोकना।
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मौसम: क्या उस समय तेज हवाएं या बारिश हो रही थी, इसकी भी जांच की जा रही है।
थाईलैंड के परिवहन मंत्रालय ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और निर्माण कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा मानकों पर सवाल
इस हादसे ने थाईलैंड में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में ‘सेफ्टी ऑडिट’ की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है।
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क्या चलती ट्रेन के ऊपर निर्माण कार्य की अनुमति दी जानी चाहिए?
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क्या निर्माण क्षेत्र और रेलवे लाइन के बीच पर्याप्त सुरक्षित दूरी रखी गई थी?
यह घटना न केवल एक मानवीय त्रासदी है, बल्कि इंजीनियरिंग और प्रबंधन की बड़ी विफलता का परिणाम है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए “जीरो टॉलरेंस” सुरक्षा नीति अपनाना अनिवार्य है।
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