मुबई. भारतीय विमानन क्षेत्र (Indian Aviation Sector) इस समय एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। देश की दो सबसे बड़ी एयरलाइंस— IndiGo और Air India — ने केंद्र सरकार के सामने अपनी चुनौतियां रखी हैं। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और कूटनीतिक तनाव के कारण बढ़ती संचालन लागत ने एयरलाइनों की कमर तोड़ दी है।
कंपनियों ने सरकार से विमानन ईंधन (ATF) पर टैक्स कम करने और निजी हवाई अड्डों के शुल्क (Airport Charges) को घटाने की गुहार लगाई है।
1. क्यों उड़ानें हो रही हैं लंबी और महंगी?
पश्चिम एशिया में ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक हवाई मार्ग को बदल दिया है। सुरक्षा कारणों से कई एयरस्पेस (Airspace) प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।
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पाकिस्तान का रास्ता बंद: भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक कड़वाहट के कारण भारतीय विमानों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है।
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IndiGo की चुनौती: लंदन और यूरोपीय देशों की उड़ानों के लिए इंडिगो को अब अफ्रीका के ऊपर से लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है।
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Air India का स्टॉप: उत्तरी अमेरिका (US & Canada) जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट्स को अब बीच में अतिरिक्त ‘फ्यूल स्टॉप’ (Technical Stop) लेना पड़ रहा है, जिससे उड़ान का समय 2 से 3 घंटे बढ़ गया है।
विशेषज्ञों की राय: जब उड़ान का समय बढ़ता है, तो न केवल ईंधन की खपत बढ़ती है, बल्कि क्रू (Crew) की ड्यूटी के घंटे और विमान के इंजन का मेंटेनेंस खर्च भी बढ़ जाता है।
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2. ईंधन कर (ATF Tax): एयरलाइंस की सबसे बड़ी परेशानी
किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का लगभग 30% से 40% हिस्सा केवल ईंधन (Aviation Turbine Fuel) पर खर्च होता है। भारत में इस पर लगने वाला टैक्स दुनिया में सबसे अधिक है:
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केंद्रीय कर: लगभग 11% की सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी।
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राज्यों का वैट (VAT): विभिन्न राज्यों में यह 1% से लेकर 29% तक है।
एयरलाइंस का तर्क है कि यदि सरकार ईंधन को GST के दायरे में लाती है या टैक्स में अस्थायी राहत देती है, तो वे यात्रियों पर बढ़ते किराए का बोझ डालने से बच सकती हैं।
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3. बाजार पर किसका कितना कब्जा?
जनवरी के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय आसमान में इन दो दिग्गजों का ही दबदबा है:
| एयरलाइन | मार्केट शेयर (%) | वर्तमान स्थिति |
| IndiGo | 63.6% | घरेलू बाजार में निर्विवाद लीडर। |
| Air India ग्रुप | 26.5% | टाटा के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर जोर। |
इन दोनों को मिलाकर भारतीय बाजार का लगभग 90% हिस्सा इन्हीं के पास है, इसलिए इनका संकट पूरे देश की कनेक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है।
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4. आम यात्रियों पर क्या होगा असर?
अगर सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिलती है, तो आने वाले हफ्तों में हवाई किराए (Airfare) में 10% से 15% तक की उछाल देखी जा सकती है। विशेषकर अंतरराष्ट्रीय रूट (Europe और US) के टिकट काफी महंगे हो सकते हैं।
निष्कर्ष: एयरलाइनों ने गेंद अब सरकार के पाले में डाल दी है। अब देखना यह है कि क्या नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) और वित्त मंत्रालय टैक्स में कटौती कर यात्रियों को राहत देते हैं या नहीं।
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