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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT बुधवार को सौंप सकती है अंतिम रिपोर्ट; सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगा जवाब

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लखनऊ । मंगलवार, 14 जुलाई 2026

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा चोरी और करोड़ों रुपये के गबन मामले की जांच अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दी गई 15 जुलाई की अतिरिक्त समयसीमा के भीतर विशेष जांच टीम (SIT) अपनी अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि बुधवार को यह रिपोर्ट शासन के सुपुर्द की जा सकती है।

इस बीच, यह संवेदनशील मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश SIT से मामले की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की गई है।

40 दिनों में 70 बार चोरी: SIT जांच में चौंकाने वाले खुलासे

SIT की प्रारंभिक जांच में यह बात पहले ही साफ हो चुकी है कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच मंदिर के काउंटिंग रूम (दान गणना कक्ष) से करीब 70 बार चढ़ावे की चोरी की गई। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चला कि नोटों की गिनती में लगे कर्मचारी ही कपड़ों और अन्य जगहों पर नोट छिपाकर ले जा रहे थे।

इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, जिनके पास से लगभग 80 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की नकद बरामदगी का दावा किया गया है। गिरफ्तार मुख्य आरोपियों में अविनाश शुक्ला, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं, जिनके खिलाफ कड़ी कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा, मंदिर परिसर में पिछले 17 वर्षों से तैनात रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव को भी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से हटाकर गोरखपुर स्थानांतरित कर दिया गया है।

अंतिम रिपोर्ट में हो सकती हैं ये अहम सिफारिशें

सूत्रों के अनुसार, बुधवार को सरकार को सौंपी जाने वाली अंतिम रिपोर्ट में कई बड़े प्रशासनिक और सुरक्षा बदलावों की सिफारिश की जा सकती है:

  • पारदर्शिता और प्रोफेशनल मैनेजमेंट: रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए वित्तीय प्रबंधन के लिए पेशेवर प्रबंधकों (Professional Management) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की सिफारिश की जा सकती है।

  • आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा: मंदिर परिसर और काउंटिंग रूम में मैनुअल निगरानी के बजाय पूरी तरह से आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणाली और फुल-प्रूफ सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम लागू करने का सुझाव दिया गया है।

  • बैंक और कर्मचारियों की जवाबदेही: चढ़ावे की गिनती में शामिल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सहित 6 प्रमुख बैंकों को नोटिस जारी कर उन कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है जो इस प्रक्रिया में शामिल थे।

कोर्ट में सीबीआई जांच और फोरेंसिक ऑडिट की मांग

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में इस पूरे घोटाले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने की मांग की गई है। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट का किसी स्वतंत्र एजेंसी से ‘फोरेंसिक ऑडिट’ कराने और दान में मिलने वाली राशि का पूरा विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव सार्वजनिक करने की भी अपील की गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?

यह मामला अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे की राशि में हुई हेराफेरी से जुड़ा है। SIT की जांच में सामने आया है कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 बार नोट चोरी किए जाने की पुष्टि हुई है।

2. इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?

इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके पास से लाखों रुपये की नकदी बरामद की गई है। सुरक्षा में लापरवाही बरतने के आरोप में मंदिर के मुख्य सीसीटीवी और वायरलेस प्रभारी अर्जुन देव का भी तबादला कर दिया गया है।

3. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर क्या आदेश दिया है?

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश SIT से इस मामले पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और राम मंदिर ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख विभिन्न समाचार माध्यमों और सूत्रों से प्राप्त नवीनतम जानकारियों पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष और वैधानिक कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार और माननीय न्यायालय के आधिकारिक आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगी।

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