लखनऊ | शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर लखनऊ में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 1947 के भारत विभाजन को लेकर बड़ा राजनीतिक और ऐतिहासिक बयान दिया है। सीएम योगी ने कहा कि यदि स्वतंत्रता के समय नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री होते, तो कोई भी ताकत भारत का विभाजन नहीं कर पाती और न ही देश की सीमाओं को कोई नुकसान पहुंचा पाती।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व को भी नमन करते हुए कहा कि अगर उस दौर में पटेल जैसे दृढ़ इच्छाशक्ति वाले नेता के हाथों में देश की कमान होती, तो भारत को खंडित करना असंभव होता।
कांग्रेस और तत्कालीन नेतृत्व पर तीखा प्रहार
कार्यक्रम में बोलती हुई सीएम योगी ने विभाजन के समय हुए भीषण नरसंहार और मानवीय विस्थापन के लिए तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की नीतियों और सत्ता की लालसा को जिम्मेदार ठहराया।
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सत्ता का स्वार्थ: उन्होंने आरोप लगाया कि 1947 में सत्ता पाने की जल्दबाजी में देश के हितों से समझौता किया गया, जिसकी भारी कीमत निर्दोष देशवासियों को चुकानी पड़ी।
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अवांछित भूभाग का हस्तांतरण: सीएम योगी ने दावा किया कि विभाजन के दौरान पाकिस्तान को ऐसे भूभाग और क्षेत्र भी दे दिए गए, जिनकी मांग उस समय पाकिस्तान की ओर से भी नहीं की गई थी।
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राष्ट्रीय एकता की सीख: उन्होंने कहा कि 1947 की त्रासदी केवल सीमाओं का अंकन नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों के सपनों, रिश्तों और जीवन का विनाश था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: भारत में हर साल 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन 1947 के बंटवारे के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लाखों निर्दोष लोगों और विस्थापन की त्रासदी झेलने वाले परिवारों की याद में मनाया जाता है।
Q2: सीएम योगी आदित्यनाथ ने विभाजन के संदर्भ में क्या मुख्य बयान दिया?
उत्तर: सीएम योगी ने कहा कि अगर 1947 में नरेंद्र मोदी या सरदार वल्लभभाई पटेल देश के प्रधानमंत्री होते, तो भारत का विभाजन कभी संभव नहीं होता और देश को नुकसान नहीं पहुँचता।
Q3: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय एकता को लेकर क्या अपील की?
उत्तर: उन्होंने देशवासियों से जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा के आधार पर होने वाले आपसी अंतरविरोधों से ऊपर उठकर एक मजबूत और अखंड भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख 14 अगस्त को आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर दिए गए सार्वजनिक भाषण और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इसमें व्यक्त किए गए विचार एवं वक्तव्य संबंधित वक्ता के निजी राजनीतिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
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