लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को ‘हर घर नल योजना’ (जल जीवन मिशन) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी (सपा) ने योजना में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की, जिसे जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने पूरी तरह से खारिज कर दिया।
विपक्ष के तीखे वार: “टंकियां गिर रही हैं, सड़कें बदहाल हैं”
सपा विधायक कमाल अख्तर और प्रभु नारायण सिंह ने नियम-56 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए सरकार को घेरा। विपक्ष के मुख्य आरोप निम्नलिखित रहे:
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घटिया निर्माण: विपक्षी सदस्यों ने दावा किया कि लखीमपुर और सीतापुर जैसे जिलों में पानी की टंकियां गिर रही हैं, जो भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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अधूरा काम: आरोप लगाया गया कि पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई गांवों की सड़कें और गलियां वैसी ही छोड़ दी गई हैं, जिससे ग्रामीणों का चलना दूभर हो गया है।
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डेडलाइन पर सवाल: सपा ने कहा कि योजना की समय सीमा बार-बार बढ़ाई जा रही है और अब इसे 2028 तक खींच दिया गया है।
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आंकड़ों का हवाला: सदन में दावा किया गया कि केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज कुल शिकायतों में से 85% केवल उत्तर प्रदेश से हैं।
मंत्री का पलटवार: “विपक्ष के पास जमीनी जानकारी नहीं”
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि विपक्ष के लोग क्षेत्र से कटे हुए हैं और सदन को गुमराह कर रहे हैं।
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नगर पंचायत का तर्क: मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में पानी न आने की शिकायत की गई है, वे नगर पंचायतें हैं, जिनका कार्य जल जीवन मिशन के तहत नहीं आता।
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सख्त कार्रवाई: उन्होंने सदन को बताया कि जहां भी गड़बड़ी पाई गई है, वहां संबंधित एजेंसियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और उनकी 10-10 प्रतिशत धनराशि भी काटी गई है।
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योजना की प्रगति: सरकार ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि बुंदेलखंड और विंध्य जैसे प्यासे क्षेत्रों में इस योजना ने क्रांतिकारी बदलाव किया है।
अध्यक्ष ने खारिज की चर्चा की मांग
सपा सदस्यों द्वारा इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा और जांच की मांग को विधानसभा अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया। इससे पहले भाजपा के अपने ही विधायक बृजभूषण राजपूत ने भी महोबा में इस योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे, जिसने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का और मौका दे दिया।
फिलहाल सरकार ने किसी भी तरह की बड़ी जांच से इनकार किया है, लेकिन गांवों में खोदी गई सड़कों और लो-प्रेशर पानी की समस्या एक ऐसा मुद्दा है जो आने वाले दिनों में भी सदन में गूंजता रहेगा।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. उत्तर प्रदेश विधानसभा में ‘हर घर नल योजना’ पर क्या विवाद हुआ?
विधानसभा के बजट सत्र में समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और उखड़ी हुई सड़कों का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने लखीमपुर और सीतापुर में पानी की टंकियों के गिरने का हवाला देते हुए जांच की मांग की।
2. जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने विपक्ष के आरोपों पर क्या सफाई दी?
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष सदन को गुमराह कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में शिकायतें मिली हैं, उनमें से कई नगर पंचायतें हैं जो इस मिशन के अंतर्गत नहीं आतीं। साथ ही, उन्होंने बताया कि गड़बड़ी करने वाली एजेंसियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
3. ‘हर घर नल योजना’ (जल जीवन मिशन) की समय सीमा (Deadline) क्या है?
विपक्ष का आरोप है कि योजना की समय सीमा बार-बार बढ़ाई जा रही है और अब इसे 2028 तक खींच दिया गया है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से हर ग्रामीण परिवार को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है।
4. क्या भाजपा के अपने ही विधायकों ने इस योजना पर सवाल उठाए हैं?
हाँ, रिपोर्ट के अनुसार भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने महोबा जिले में इस योजना की कार्यप्रणाली पर सदन में सवाल उठाए, जिससे विपक्ष को सरकार को घेरने का और अधिक मौका मिल गया।
5. यदि पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कें खोदी गई हैं, तो जिम्मेदारी किसकी है?
नियमों के अनुसार, पाइपलाइन बिछाने वाली कार्यदायी संस्था की यह जिम्मेदारी है कि वह कार्य पूर्ण होने के बाद सड़कों को पूर्ववत स्थिति में लाए। सरकार ने सदन में आश्वासन दिया है कि लापरवाही बरतने वाली कंपनियों की 10% धनराशि काटी जा रही है।
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