लखनऊ.यूपी बोर्ड की परीक्षाएं कल से शुरू होने वाली हैं, लेकिन कानपुर के बिल्हौर स्थित बिल्हौर इंटर कॉलेज के 13 छात्र-छात्राओं के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन और शिक्षकों के बीच विषयों (NTT और अकाउंटेंट) को लेकर चल रहे आंतरिक विवाद की सजा मासूम छात्रों को भुगतनी पड़ रही है। परीक्षा से महज 24 घंटे पहले भी इन छात्रों के पास प्रवेश पत्र नहीं हैं, जिससे वे गहरे मानसिक तनाव में हैं।
3 साल की पढ़ाई, पर अब छात्र मानने से इनकार
पीड़ित छात्राओं—शिवानी, पायल, सुमेरा यासमीन, कोमल और बंदना—का आरोप है कि वे पिछले तीन वर्षों से इसी विद्यालय में नियमित रूप से पढ़ाई कर रही हैं और समय पर फीस भी जमा की है। इसके बावजूद, अब कॉलेज प्रशासन उन्हें अपना छात्र मानने से इनकार कर रहा है। छात्राओं ने बताया कि पिछले दो महीनों से उन्हें NTT (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग) का छात्र बताकर कक्षाओं में बैठने से भी रोका जा रहा था।
विषय बदलने का दावा, पर प्रवेश पत्र में पुरानी जानकारी
मामले में एक और पेंच तब फंसा जब छात्र खुर्शीद आलम, उजैर, अदनान और कदीर ने बताया कि शिक्षकों के निर्देश पर उन्होंने NTT से विषय बदलकर अकाउंटेंट लिया था। वे साल भर इसी की पढ़ाई करते रहे, लेकिन जब बोर्ड से प्रवेश पत्र जारी हुए, तो उनमें अब भी NTT विषय ही अंकित है। इससे छात्रों के बीच भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि वे किस विषय की परीक्षा देंगे।
प्रबंधन और प्रधानाचार्य के अलग-अलग तर्क
कॉलेज के प्रबंधक प्रभाकर श्रीवास्तव का कहना है कि:
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दिसंबर 2024 में बोर्ड का पासवर्ड हैक हो गया था, जिसके कारण केवल 4 छात्रों का ही वैध प्रवेश हो पाया।
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शेष 9 छात्र कॉलेज के नहीं हैं।
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उन्होंने गेस्ट टीचर चित्रांशी पर कक्षा 11 के फर्जी अंकपत्र जारी करने का आरोप लगाया है।
वहीं, प्रधानाचार्य सुरजीत सिंह यादव का कहना है कि NTT के 4 छात्रों ने अर्धवार्षिक परीक्षा नहीं दी थी, इसलिए कक्षाएं नहीं चलीं। उनके अनुसार भी बाकी 9 छात्र विद्यालय के रिकॉर्ड में नहीं हैं।
अधर में भविष्य: ‘घरवाले दे रहे हैं ताने’
छात्रा काजल ने रोते हुए अपनी व्यथा सुनाई कि अब घरवाले भी उन पर सवाल उठा रहे हैं। ताने दिए जा रहे हैं कि ऐसा विषय क्यों चुना जिसका एडमिट कार्ड तक नहीं मिला। परेशान छात्रों ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में गुहार लगाई है। हालांकि, जांच टीम अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
छात्रों और उनके अभिभावकों की अब शासन से केवल एक ही मांग है: “परीक्षा शुरू होने से पहले विषय सुधार के साथ प्रवेश पत्र उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनका साल बर्बाद न हो।”
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