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Lenskart Controversy: क्या लेंसकार्ट में बिंदी-तिलक पर है बैन? पीयूष बंसल ने तोड़ी चुप्पी

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मुंबई | गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

देश की दिग्गज आईवियर स्टार्टअप कंपनी Lenskart इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। सोशल मीडिया पर कंपनी के कथित ‘ग्रूमिंग और यूनिफॉर्म गाइड’ के कुछ स्क्रीनशॉट्स वायरल होने के बाद “धार्मिक भेदभाव” के आरोप लगने शुरू हो गए। विवाद इतना बढ़ा कि कंपनी के फाउंडर और CEO पीयूष बंसल (Peyush Bansal) को खुद सामने आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा।

📄 क्या था पूरा विवाद? (The Viral Document)

सोशल मीडिया पर वायरल हुए 20 पन्नों के ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट में कर्मचारियों के लिए कुछ कड़े नियम बताए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा विवाद निम्नलिखित बिंदुओं पर हुआ:

  • हिंदू प्रतीकों पर पाबंदी: कथित तौर पर बिंदी, तिलक और कलावा (धार्मिक धागा) पहनने को “अनप्रोफेशनल” बताते हुए प्रतिबंधित किया गया था। सिंदूर को भी “नाममात्र” लगाने की सलाह दी गई थी।

  • चुनिंदा छूट: गाइड में हिजाब और पगड़ी (टर्बन) पहनने की अनुमति दी गई थी, हालांकि उनके लिए भी काला रंग और कंपनी का लोगो न छिपने जैसी शर्तें रखी गई थीं।

  • ज्वेलरी: रंगीन पत्थरों वाली अंगूठियों और क्लिचर के इस्तेमाल पर रोक थी।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे “दोहरा मापदंड” और “हिंदूफोबिक” बताते हुए #BoycottLenskart ट्रेंड करना शुरू कर दिया।

📢 पीयूष बंसल का आधिकारिक स्पष्टीकरण: “यह पुराना दस्तावेज है”

विवाद गहराते देख पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर दो बार विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. आउटडेटेड डॉक्यूमेंट: बंसल ने स्वीकार किया कि वायरल हो रहा दस्तावेज कंपनी का है, लेकिन उन्होंने इसे “आउटडेटेड इंटरनल ट्रेनिंग नोट” बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वर्तमान HR पॉलिसी नहीं है।

  2. गलती की स्वीकारोक्ति: उन्होंने माना कि दस्तावेज में बिंदी और तिलक को लेकर लिखी गई लाइनें गलत थीं। बंसल ने कहा, “यह एक ऐसी लाइन थी जो कभी लिखी ही नहीं जानी चाहिए थी। यह हमारे मूल्यों या वास्तविक कार्यशैली को नहीं दर्शाती।”

  3. पहले ही हटाया गया: सीईओ के मुताबिक, कंपनी ने 17 फरवरी, 2026 को ही इस गलती को पकड़ लिया था और सार्वजनिक विवाद होने से काफी पहले ही इसे ट्रेनिंग मटेरियल से हटा दिया था।

  4. माफी और जिम्मेदारी: पीयूष बंसल ने इस चूक के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी ली और कहा कि वे भविष्य में ऐसे कंटेंट की कड़ी समीक्षा करेंगे।

पीयूष बंसल का बयान: “हमारे स्टोर पर हजारों कर्मचारी अपनी आस्था और संस्कृति को गर्व के साथ पहनते हैं। हमारी वर्तमान पॉलिसी में बिंदी, तिलक या किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है।”

⚖️ विशेषज्ञों की राय और वर्तमान स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि लेंसकार्ट जैसे बड़े ब्रांड्स अक्सर ग्लोबल स्टैंडर्ड्स या यूनिफॉर्मिटी के चक्कर में स्थानीय सांस्कृतिक संवेदनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। हालाँकि, कंपनी के त्वरित स्पष्टीकरण और माफी ने कुछ हद तक स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन सोशल मीडिया पर अभी भी एक वर्ग इस बात पर सवाल उठा रहा है कि ऐसी गाइडलाइन आखिर बनी ही क्यों थी।

वर्तमान स्थिति:

  • कंपनी ने अपने सभी स्टोर्स को नए और संशोधित ग्रूमिंग निर्देश जारी कर दिए हैं।

  • स्टोर्स में कर्मचारी अपनी धार्मिक मान्यताओं (बिंदी, कलावा, तिलक आदि) का पालन करने के लिए स्वतंत्र हैं।

  • सोशल मीडिया पर बहस अभी भी जारी है, जहाँ लोग कॉर्पोरेट नीतियों में ‘धार्मिक तटस्थता’ की मांग कर रहे हैं।

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