रामपुर । गुरुवार, 16 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के रामपुर से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट, मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, पर प्रशासन का अब तक का सबसे कड़ा प्रहार हुआ है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर में बने 40 भवनों में से 38 भवनों को पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया है और उन्हें गिराने (ध्वस्तीकरण) का फरमान सुना दिया है।
योगी सरकार की अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
मानचित्र को लेकर कैसे फंसा पेंच?
रामपुर विकास प्राधिकरण के अनुसार, जब यूनिवर्सिटी परिसर के निर्माण कार्यों की जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूरे परिसर में बने 40 बड़े भवनों में से केवल 2 भवनों (मेडिकल कॉलेज भवन और अकादमिक ब्लॉक) का ही मानचित्र (नक्शा) स्वीकृत था। बाकी के 38 भवनों का निर्माण बिना किसी वैध अनुमति या पास नक्शे के धड़ल्ले से कर दिया गया था।
यह क्षेत्र पहले जिला पंचायत के दायरे में आता था और सितंबर 2024 में इसे विकास प्राधिकरण (RDA) के दायरे में शामिल किया गया। इसके बाद जब पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए और क्षेत्रीय अवर अभियंता (Junior Engineer) ने अपनी रिपोर्ट दी, तो इस भारी अनियमितता का खुलासा हुआ। प्रशासन ने इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन उनकी दलीलें संतोषजनक न होने के कारण उन्हें खारिज कर दिया गया।
15 दिन का मिला है आखिरी अल्टीमेटम
रामपुर के जिलाधिकारी और आरडीए (RDA) के उपाध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि यह कठोर आदेश उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 (1) के तहत पारित किया गया है।
प्रशासन ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन (जौहर ट्रस्ट) को 15 दिन की मोहलत दी है ताकि वे स्वयं इन अवैध निर्माणों को वहां से हटा लें। यदि इस तय समय सीमा के भीतर प्रबंधन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो रामपुर विकास प्राधिकरण खुद भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करेगा और इसका पूरा खर्च भी प्रबंधन से ही वसूला जाएगा।
सब कुछ जानते हुए भी की गई नियमों की अनदेखी
प्रशासन का सबसे मजबूत तर्क यह है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन नियमों से पूरी तरह वाकिफ था। अगर उन्हें नियमों की जानकारी नहीं होती, तो वे शुरुआत में दो भवनों के नक्शे जिला पंचायत से पास नहीं करवाते। दो भवनों का नक्शा पास कराना और बाकी 38 भवनों को बिना अनुमति के बना देना साफ तौर पर कानून की जानबूझकर की गई अनदेखी और बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
सफाई और सुनवाई का पूरा मौका देने के बाद ही प्रशासन ने यह कानूनी कदम उठाया है। अब पूरे उत्तर प्रदेश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले 15 दिनों में जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन क्या रुख अपनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: जौहर यूनिवर्सिटी के कितने भवनों को गिराने का आदेश दिया गया है?
उत्तर: यूनिवर्सिटी परिसर में बने कुल 40 भवनों में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत नक्शे के पाए जाने के कारण अवैध घोषित कर गिराने का आदेश दिया गया है। केवल 2 भवनों का ही नक्शा वैध पाया गया है।
प्रश्न 2: प्रशासन ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को कितने दिनों का समय दिया है?
उत्तर: प्रशासन ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर खुद अवैध निर्माण हटाने का समय दिया है।
प्रश्न 3: क्या यह मामला कोर्ट में भी जा सकता है?
उत्तर: नियमानुसार, जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरण के इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रबंधन उच्च न्यायालय (High Court) या संबंधित अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करने का विकल्प चुन सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
इस लेख में दी गई जानकारी वर्तमान प्रशासनिक रिपोर्टों, आधिकारिक बयानों और मीडिया स्रोतों पर आधारित है। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या अंतिम न्यायिक टिप्पणी के रूप में न देखा जाए।
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