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यूपी ई-खसरा / डिजिटल क्रॉप सर्वे (AgriStack): किसानों के लिए डिजिटल क्रांति की पूरी जानकारी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

लखनऊ |

उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और किसानों को सरकारी योजनाओं का त्वरित लाभ पहुंचाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के 75 जिलों के 93,870 से अधिक राजस्व गांवों में e-Khasra / डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey) अभियान को तेजी से लागू कर दिया गया है।

वर्तमान खरीफ फसल सीजन के दौरान खेतों में बोई गई वास्तविक फसलों का एक सटीक और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था से न केवल पारंपरिक कागजी लिखापढ़ी (पटवारी/लेखपाल प्रणाली) पर निर्भरता समाप्त होगी, बल्कि किसानों को बिना किसी बिचौलिये के सीधे सरकारी लाभ प्राप्त होंगे।

🌾 डिजिटल क्रॉप सर्वे (AgriStack) क्या है और यह कैसे काम करता है?

डिजिटल क्रॉप सर्वे केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त ‘AgriStack’ (एग्रीस्टैक) पहल का एक प्रमुख हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक खेत (खसरा नंबर) में बोई गई फसल की वास्तविक स्थिति को जीपीएस और मोबाइल एप्लीकेशन तकनीक के जरिए दर्ज करना है।

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यह प्रक्रिया कैसे काम करती है?

  1. ऑन–ग्राउंड लाइव वेरिफिकेशन: सरकार द्वारा नियुक्त सर्वेक्षक/कर्मचारी खुद खेत पर पहुंचते हैं।
  2. जिओ–रेफरेंसिंग (Geo-Referencing): मोबाइल ऐप के जरिए खेत की सटीक जीपीएस लोकेशन और फसल की लाइव तस्वीर अपलोड की जाती है।
  3. खरीफ फसलों पर विशेष जोर: वर्तमान में धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, उड़द, मूंग और तिल जैसी प्रमुख खरीफ फसलों का ब्योरा प्राथमिकता के आधार पर एग्रीस्टैक पोर्टल से जोड़ा जा रहा है।
  4. कागजी झंझट से मुक्ति: अब किसानों को खसरा-खतौनी और फसल सत्यापन के लिए राजस्व अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

 

🚀 किसानों को ई–खसरा रिकॉर्ड से मिलने वाले 4 बड़े लाभ

डिजिटल क्रॉप सर्वे से उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव आने वाला है। मुख्य लाभों का विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

लाभ का क्षेत्रविवरण व प्रभाव
1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाफसल नुकसान के दौरान बोई गई फसल के भौतिक सत्यापन में होने वाली देरी खत्म होगी। बीमा क्लेम की राशि सीधे और तेजी से बैंक खाते में ट्रांसफर होगी।
2. तुरंत आपदा मुआवजाबाढ़, सूखा या जलभराव जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रभावित खेतों की पहचान तुरंत हो सकेगी, जिससे राहत राशि बिना किसी कागजी देरी के मिलेगी।
3. पारदर्शी सरकारी खरीद (MSP)न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज बेचते समय बिचौलियों और फर्जी पंजीकरणों का खात्मा होगा। वास्तविक किसान अपनी बोई गई फसल आसानी से बेच सकेंगे।
4. सब्सिडी एवं पीएम–किसानपीएम किसान सम्मान निधि, खाद, बीज और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी केवल वास्तविक खेती करने वाले किसानों तक पहुंचेगी।

 

🔗 एग्रीस्टैक पोर्टल से जुड़ेगा 6.6 करोड़ खसरा नंबरों का डेटाबेस

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के लगभग 6.6 करोड़ खसरा नंबरों को जियो-रेफरेंस करके डिजिटल रूप से एकीकृत AgriStack Portal से जोड़ रही है।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कृषि विभाग, राजस्व विभाग, बैंक और बीमा कंपनियां एक ही प्रमाणित और पारदर्शी डेटा का उपयोग करेंगी। इससे किसानों को क्रेडिट कार्ड (KCC) और कृषि ऋण (Agriculture Loans) प्राप्त करने में बेहद आसानी होगी।

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❓ Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: क्या ई–खसरा/डिजिटल क्रॉप सर्वे किसानों को खुद करना होगा?

उत्तर: नहीं, किसानों को यह सर्वे खुद नहीं करना है। यह सर्वे सरकार द्वारा नियुक्त अधिकृत सर्वेक्षकों और राजस्व/कृषि विभाग के कर्मचारियों द्वारा खेतों पर जाकर किया जाता है।

Q2: क्या इस सर्वे से जमीन के मालिकाना हक (Ownership) पर कोई प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: बिलकुल नहीं। यह सर्वे केवल खेत में बोई गई फसल (Crop Pattern) का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए है। इससे जमीन के मालिकाना हक या स्वामित्व की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ता।

Q3: किसान अपना ई–खसरा रिकॉर्ड ऑनलाइन कैसे चेक कर सकते हैं?

उत्तर: किसान उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और यूपी भूलेख (UP Bhulekh) पोर्टल/मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने खसरा नंबर का डिजिटल रिकॉर्ड ऑनलाइन देख सकते हैं।

📌 संबंधित खबरें व अधिक जानकारी

Disclaimer

यह लेख उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक घोषणाओं और राजस्व व कृषि विभाग द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। योजनाओं के नियम, क्रियान्वयन की तिथियां और पोर्टल की जानकारी समय-समय पर शासन द्वारा अपडेट की जा सकती हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।