अमृतसर. सिखों के सर्वोच्च धार्मिक स्थल श्री हरिमंदिर साहिब (Golden Temple) को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) वीडियो ने दुनिया भर के सिख समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस वीडियो में दिखाई गई आपत्तिजनक सामग्री को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में AI तकनीक का इस्तेमाल कर एक कंकाल को पगड़ी पहने और जूते पहनकर पवित्र परिसर के भीतर घूमते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं, वीडियो में उसे लंगर ग्रहण करते हुए भी फिल्माया गया है।
सिख मर्यादा के अनुसार, हरिमंदिर साहिब के भीतर नंगे सिर जाना और जूते पहनकर प्रवेश करना सख्त वर्जित है। ऐसे में तकनीक के जरिए बनाई गई यह “काल्पनिक बेअदबी” धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली मानी जा रही है।
SGPC की सख्त चेतावनी और कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए SGPC के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। कमेटी के अनुसार:
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साइबर सेल को शिकायत: SGPC ने पुलिस और साइबर क्राइम सेल को इस वीडियो को बनाने और प्रसारित करने वाले अकाउंट्स की पहचान करने के निर्देश दिए हैं।
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मर्यादा का उल्लंघन: पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तकनीक के नाम पर किसी भी धर्म की शुचिता और मर्यादा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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अकाउंट्स पर नजर: संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X, Instagram, Facebook) से इस वीडियो को तुरंत हटाने की अपील की गई है।
AI तकनीक और ‘डिजिटल बेअदबी’ का बढ़ता खतरा
यह पहली बार नहीं है जब AI का दुरुपयोग धार्मिक अशांति फैलाने के लिए किया गया हो। विशेषज्ञों का मानना है कि:
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भ्रामक सामग्री: AI के जरिए वास्तविक दिखने वाले दृश्य तैयार करना अब बहुत आसान हो गया है, जिसका इस्तेमाल शरारती तत्व सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए कर रहे हैं।
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कानूनी पेच: इस तरह के ‘डीपफेक’ या AI जनित वीडियो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और IT एक्ट के दायरे में आते हैं।
“पवित्र स्थलों से जुड़े इस तरह के कंटेंट का निर्माण पूरी तरह अस्वीकार्य है। यह न केवल तकनीक का दुरुपयोग है, बल्कि समाज की शांति भंग करने की एक सोची-समझी साजिश है।” — स्थानीय सिख संगठन
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में रोष
अमृतसर के स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने इसे “डिजिटल बेअदबी” करार दिया है। लोगों की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकार को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के लिए सख्त नियम बनाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी धर्म की भावनाओं के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो सके।
वर्तमान स्थिति:
फिलहाल जांच एजेंसियां वीडियो के IP एड्रेस और ओरिजिन (कहाँ से वीडियो पहली बार अपलोड हुआ) को ट्रेस करने में जुटी हैं। SGPC ने संगत (श्रद्धालुओं) से अपील की है कि वे ऐसे वीडियो को साझा न करें और संयम बनाए रखें।
Matribhumisamachar


