कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम रहा। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 291 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीखों के ऐलान के महज दो दिन बाद आई इस लिस्ट ने राज्य में चुनावी बिगुल फूंक दिया है।
ममता बनर्जी ने इस बार भी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से ही मैदान में उतरने का फैसला किया है। यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्षी दल भाजपा ने उनके खिलाफ अपने कद्दावर नेता और शुभेंदु अधिकारी को इसी सीट से चुनावी अखाड़े में उतारा है।
बंगाल का चुनावी रण: 2 चरणों में होगा फैसला
चुनाव आयोग ने इस बार पश्चिम बंगाल के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। पिछली बार के 8 चरणों के मुकाबले, इस बार मतदान केवल दो चरणों में संपन्न होगा:
-
पहला चरण: 23 अप्रैल 2026 (152 सीटें)
-
दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026 (142 सीटें)
-
नतीजे: 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
TMC की सूची की 5 बड़ी बातें: युवाओं और महिलाओं पर भरोसा
ममता बनर्जी ने अपनी सूची में सामाजिक समीकरणों और नए चेहरों का एक अनूठा संतुलन पेश किया है:
-
युवाओं को प्राथमिकता: पार्टी ने कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर युवा चेहरों और नए चेहरों को मौका दिया है।
-
महिलाओं की भागीदारी: मुख्यमंत्री ने 52 महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है, जो महिला सशक्तीकरण के प्रति उनके संकल्प को दर्शाता है।
-
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन: सूची में 95 अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) और 47 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को जगह दी गई है।
-
गठबंधन का समीकरण: कुल 294 सीटों में से टीएमसी 291 पर लड़ रही है, जबकि दार्जिलिंग की 3 सीटें अपने सहयोगी दल ‘भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा’ (BGPM) के लिए छोड़ी हैं।
-
प्रमुख चेहरे: फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), चंद्रिमा भट्टाचार्य (दमदम उत्तर), और पहली बार चुनाव लड़ रहे कुणाल घोष (बेलेघाटा) जैसे दिग्गजों के नामों पर मुहर लगी है।
भाजपा की चुनौती और ‘भवानीपुर’ का हाई-वोल्टेज मुकाबला
भाजपा ने अपनी पहली सूची में 144 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर और नंदीग्राम, दोनों सीटों से मैदान में उतारकर लड़ाई को बेहद दिलचस्प बना दिया है। इसके अलावा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष अपनी पुरानी सीट खड़गपुर सदर से वापसी कर रहे हैं।
ममता बनर्जी ने उम्मीदवारों की घोषणा के दौरान केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा, “यह बंगाल की अस्मिता और संस्कृति की लड़ाई है। हम 226 से ज्यादा सीटें जीतकर फिर से सरकार बनाएंगे।”
क्या बदलेगा बंगाल का मूड?
टीएमसी की पहली सूची से स्पष्ट है कि पार्टी इस बार ‘प्रो-इन्कम्बेंसी’ और युवा नेतृत्व के दम पर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा के आक्रामक रुख ने इस चुनाव को द्विपक्षीय मुकाबले में तब्दील कर दिया है। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
Matribhumisamachar


