कानपुर. जनवरी का यह महीना उत्तर भारत में कभी कड़ाके की ठंड तो कभी हल्की धूप वाला रहा है। इस ‘बदलते मौसम’ (Flu Season) में बच्चों की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर पड़ने लगती है, जिससे उन्हें सर्दी-खांसी, बुखार और वायरल इन्फेक्शन जल्दी अपनी चपेट में ले लेते हैं। यदि आपके घर में भी छोटे बच्चे हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
1. खान-पान में लाएं बदलाव (Superfoods for Kids)
बदलते मौसम में बच्चों के शरीर को अंदरूनी गर्मी की जरूरत होती है।
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हल्दी वाला दूध: रात को सोते समय बच्चों को चुटकी भर हल्दी वाला दूध दें। यह एक प्राकृतिक एंटी-बायोटिक है।
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मौसमी फल: विटामिन-C के लिए संतरा, अमरूद और आंवला डाइट में शामिल करें।
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बाजरा और रागी: ये अनाज शरीर को गर्म रखते हैं और पचने में आसान होते हैं।
2. लेयरिंग तकनीक (सही कपड़ों का चुनाव)
अक्सर माता-पिता बच्चों को एक ही बहुत भारी स्वेटर पहना देते हैं। इसकी जगह ‘लेयरिंग’ करें।
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बच्चों को सूती कपड़े के ऊपर एक पतली स्वेटर और फिर जैकेट पहनाएं। इससे हवा शरीर तक नहीं पहुँचती और पसीना आने पर एक लेयर हटाई जा सकती है।
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कान और पैरों को हमेशा ढक कर रखें, क्योंकि ठंड यहीं से सबसे ज्यादा प्रवेश करती है।
3. हाइड्रेशन है जरूरी
ठंड में बच्चे पानी पीना कम कर देते हैं, जिससे शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं।
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बच्चों को हल्का गुनगुना पानी पीने की आदत डालें।
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ताजी सब्जियों का सूप (जैसे टमाटर, पालक या मोरिंगा सूप) उन्हें हाइड्रेटेड रखने के साथ-साथ पोषण भी देगा।
4. पर्सनल हाइजीन पर दें ध्यान
इन्फेक्शन का सबसे बड़ा कारण कीटाणु हैं।
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बच्चा जब भी बाहर से खेलकर आए या खाना खाने बैठे, उसके हाथ साबुन से जरूर धुलवाएं।
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घर में यदि किसी बड़े को जुकाम है, तो उसे बच्चों से थोड़ी दूरी बनाकर रखने की सलाह दें।
5. स्टीम और मसाज
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हल्की सर्दी होने पर बच्चों को सादे पानी की भाप (Steam) दिलाएं, इससे बंद नाक और गले की खराश में आराम मिलता है।
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रात को सोते समय सरसों के तेल में लहसुन और अजवाइन पकाकर पैर के तलवों की मालिश करें।
डॉक्टर की सलाह कब लें?
यदि बच्चे को 101 डिग्री से ज्यादा बुखार है, उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है या वह बहुत ज्यादा सुस्त महसूस कर रहा है, तो घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर (Pediatrician) से सलाह लें।
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