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सावधान! कहीं आपके किचन में रखा गैस सिलेंडर ‘एक्सपायर’ तो नहीं? ऐसे करें पहचान और बरतें ये 5 सुरक्षा मानक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. अक्सर हम घर में गैस सिलेंडर लेते समय केवल उसका वजन और सील चेक करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दवाइयों की तरह आपके रसोई गैस सिलेंडर की भी एक ‘एक्सपायरी डेट’ (Test Due Date) होती है? एक एक्सपायर्ड सिलेंडर का उपयोग करना किसी बड़े हादसे को न्योता देना हो सकता है। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप चंद सेकंड में अपने सिलेंडर की वैधता की जांच कर सकते हैं।

1. सिलेंडर की एक्सपायरी डेट कैसे पहचानें?

गैस सिलेंडर के ऊपरी हिस्से पर, जहाँ रेगुलेटर लगाया जाता है, वहां लोहे की तीन पट्टियां (Rings) होती हैं। इनमें से एक पट्टी पर अंदर की तरफ एक विशेष कोड लिखा होता है, जैसे A-26, B-27, C-28 या D-29

इस कोड का मतलब समझें:

ये अक्षर (A, B, C, D) साल के महीनों (तिमाही) को दर्शाते हैं:

  • A: जनवरी से मार्च (पहली तिमाही)

  • B: अप्रैल से जून (दूसरी तिमाही)

  • C: जुलाई से सितंबर (तीसरी तिमाही)

  • D: अक्टूबर से दिसंबर (चौथी तिमाही)

उदाहरण के लिए: अगर आपके सिलेंडर पर ‘A-26’ लिखा है, तो इसका मतलब है कि यह सिलेंडर मार्च 2026 तक ही इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है। इसके बाद इसकी दोबारा टेस्टिंग (Re-testing) अनिवार्य है।

2. घर के लिए जरूरी 5 सुरक्षा मानक (Safety Standards)

गैस सिलेंडर की सुरक्षा केवल एक्सपायरी डेट तक सीमित नहीं है। घर को सुरक्षित रखने के लिए इन मानकों का पालन करें:

  1. पाइप और रेगुलेटर की जांच: गैस पाइप (Hose) को हर 5 साल में जरूर बदलें। हमेशा ISI मार्क वाले ‘सुरक्षा पाइप’ का ही उपयोग करें।

  2. गैस की गंध आने पर: अगर रसोई में गैस की महक आए, तो बिजली के स्विच न छुएं और न ही माचिस जलाएं। तुरंत खिड़की-दरवाजे खोल दें और रेगुलेटर बंद कर दें।

  3. सही पोजीशन: सिलेंडर को हमेशा सीधा (Upright) रखें। इसे कभी भी लिटाकर उपयोग न करें।

  4. ऊंचाई का ध्यान: गैस चूल्हा हमेशा सिलेंडर से कम से कम 6 इंच ऊपर एक स्थिर समतल सतह पर होना चाहिए।

  5. इमरजेंसी नंबर: किसी भी प्रकार के रिसाव या शिकायत के लिए तत्काल एलपीजी हेल्पलाइन नंबर 1906 पर कॉल करें। यह सेवा 24/7 उपलब्ध है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।