वाशिंगटन । शनिवार, 18 जुलाई 2026
पश्चिम एशिया (Middle East) इस समय इतिहास के सबसे भीषण सैन्य संकट से गुजर रहा है। जून में हुए इस्लामाबाद शांति समझौते (Islamabad MoU) के पूरी तरह ध्वस्त होने के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीधी जंग आज सातवें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रही है। होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर भड़की यह चिंगारी अब एक पूर्ण वैश्विक संकट में बदल चुकी है, जिसने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे अमेरिकी सहयोगियों को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
सातवें दिन का रण: CENTCOM के हवाई हमले और ईरान का पलटवार
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार रात लगातार सातवीं रात ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचों पर चौतरफा हवाई हमले किए। इन हमलों में लड़ाकू विमानों, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल कर ईरान के रडार स्टेशन, मिसाइल लॉन्च साइट, भूमिगत हथियार डिपो और लॉजिस्टिक नेटवर्क को निशाना बनाया गया। ओमान की खाड़ी में चाबहार बंदरगाह के एक प्रमुख निगरानी टावर को भी अमेरिकी हमलों में ध्वस्त कर दिया गया है।
इसके जवाब में ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने अमेरिकी बेस वाले खाड़ी देशों पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों की बौछार कर दी। ईरान ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया कि उसने इस्लामाबाद समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को आधिकारिक रूप से निलंबित कर दिया है।
मित्र देशों पर कहर: कुवैत और बहरीन में नागरिक बुनियादी ढांचे तबाह
इस युद्ध का दायरा अब सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा। शनिवार सुबह ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों ने कुवैत और बहरीन में भारी तबाही मचाई है:
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कुवैत में पानी-बिजली संकट: ईरान के मिसाइल हमलों ने कुवैत के अल-अहमदी (Al-Ahmadi) पोर्ट स्थित अमेरिकी नेवल फ्यूल-सपोर्ट पियर और एक प्रमुख बिजली एवं जल डिसेलिनेशन प्लांट (Desalination Plant) को उड़ा दिया, जिससे वहां की कई पावर यूनिट ठप हो गई हैं। इसके साथ ही कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर परिचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।
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बहरीन और जॉर्डन में एयर डिफेंस एक्टिव: बहरीन की सेना ने दावा किया कि उसने नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए कई ‘कपटी’ ईरानी हवाई हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया。 वहीं जॉर्डन की वायुसेना ने भी अपनी सीमा में घुस रहे 10 ईरानी मिसाइलों और 4 ड्रोनों को मार गिराया।
नुकसान का भयावह आंकड़ा (युद्धकालीन आकलन)
चार महीने पहले (28 फरवरी 2026) शुरू हुई इस जंग में दोनों पक्षों को अब तक अपूरणीय क्षति हुई है:
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ईरान को सैन्य और मानवीय क्षति: अमेरिकी और इजरायली आकलनों के मुताबिक, लगातार बमबारी के कारण ईरान के 6,000 से अधिक सैन्य कर्मी मारे जा चुके हैं और लगभग 15,000 घायल हैं। वहीं, ईरानी स्वतंत्र सूत्रों के अनुसार आम नागरिकों सहित कुल मौतों का आंकड़ा 3,500 से 6,000 के पार पहुंच चुका है। इसके अलावा ईरान के 190 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और 155 नौसैनिक जहाज नष्ट हो चुके हैं।
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अमेरिका और सहयोगियों को नुकसान: पेंटागन के युद्धकालीन आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 17 अमेरिकी सैनिक और ठेकेदार मारे गए हैं, जबकि 548 से अधिक सैन्य कर्मी घायल हुए हैं। कुवैत और यूएई में भी दर्जनों नागरिकों और सैनिकों की मौत हुई है।
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आर्थिक झटका और तेल संकट: होरमुज जलडमरूमध्य (जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है) पूरी तरह बंद होने के कारण वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग लग गई है। अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर इस युद्ध का बोझ अब तक $113.3 बिलियन (अरब डॉलर) से अधिक का हो चुका है।
रणनीतिक स्थिति: कौन किस पर भारी?
युद्ध के मैदान में उन्नत वायु शक्ति, सटीक गाइडेड मिसाइलों और तकनीकी श्रेष्ठता के कारण अमेरिका और उसके सहयोगी सामरिक बढ़त (Strategic Advantage) बनाए हुए हैं। हालांकि, ईरान की ‘एसिमेट्रिक वॉरफेयर’ (असममित युद्ध) रणनीति, उसकी विशाल ड्रोन-मिसाइल क्षमता और होरमुज चोकपॉइंट को ब्लॉक करने की ताकत ने अमेरिकी खेमे को भारी आर्थिक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों में डाल रखा है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव ने दोनों देशों से नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमलों को तुरंत रोकने और राजनयिक बातचीत (Diplomatic Push) शुरू करने की अपील की है, क्योंकि इस युद्ध का लंबा खिंचना वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी के गर्त में धकेल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा युद्ध का मुख्य कारण क्या है?
Ans: यह युद्ध मुख्य रूप से होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नियंत्रण और व्यापारिक जहाजों से टोल वसूलने की ईरानी कोशिशों के कारण भड़का है। जून 2026 के शांति समझौते के उल्लंघन के बाद अमेरिका ने ईरान की नाकेबंदी कर दी, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया।
Q2. इस युद्ध में कुवैत और बहरीन जैसे देश क्यों पिस रहे हैं?
Ans: कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने और रसद केंद्र हैं। ईरान अपने ऊपर हो रहे हमलों के प्रतिशोध में इन सहयोगी देशों के सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचों (जैसे तेल और पानी के प्लांट) को निशाना बना रहा है।
Q3. होरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
Ans: होरमुज जलमार्ग से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई का संकट गहरा सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख उपलब्ध युद्धकालीन रिपोर्टों, अंतरराष्ट्रीय मीडिया वक्तव्यों और सैन्य आकलनों पर आधारित है। युद्ध के मैदान की संवेदनशील स्थिति और सुरक्षा कारणों से हताहतों व आर्थिक नुकसान के सटीक आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना अत्यंत कठिन है। नवीनतम और आधिकारिक घटनाक्रमों के लिए क्षेत्रीय समाचार पोर्टलों की निगरानी करते रहें।
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