अयोध्या । मंगलवार, 18 अगस्त 2026
अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर के प्रबंधन और संचालन को लेकर एक बार फिर कानूनी सुगबुगाहट तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पीठ ने निर्मोही अखाड़ा (Nirmohi Akhara) द्वारा दायर उस आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया है, जिसमें ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के पुनर्गठन और इसे एक पूर्ण सार्वजनिक ट्रस्ट (Public Trust) के रूप में स्थापित करने की मांग की गई थी।
निर्मोही अखाड़े ने आवेदन में क्या-क्या मांगें रखीं?
निर्मोही अखाड़े ने वरिष्ठ अधिवक्ता के माध्यम से शीर्ष अदालत में अर्जी दाखिल कर वर्तमान ट्रस्ट के ढांचे और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अखाड़े द्वारा उठाई गई मुख्य मांगें निम्नलिखित थीं:
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ट्रस्ट का सार्वजनिक पुनर्गठन (Reconstitution as Public Trust): अखाड़े का तर्क था कि वर्तमान ट्रस्ट एक प्राइवेट निकाय की भांति कार्य कर रहा है। इसे सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पुनर्गठित किया जाए और केंद्र सरकार इसके ट्रस्टियों की नियुक्ति हेतु पारदर्शी नियम बनाए।
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2019 के फैसले के तहत उचित प्रतिनिधित्व: अखाड़े ने कहा कि 9 नवंबर 2019 के ऐतिहासिक अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन में निर्मोही अखाड़े को उचित भूमिका देने की बात कही थी, लेकिन वर्तमान संरचना में उसे पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
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रामानंदी परंपरा अनुसार पूजा-सेवा: मंदिर में सभी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा, भोग और सेवा रामानंदी बैरागी संप्रदाय की सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार ही संपन्न कराने की मांग की गई।
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वित्तीय फॉरेंसिक ऑडिट एवं पारदर्शिता: राम मंदिर में मिलने वाले दान और संपत्तियों के लेन-देन की निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच कराने तथा एक स्वतंत्र निगरानी समिति के गठन की मांग उठाई गई।
सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहा?
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्मोही अखाड़े के इस आवेदन को निपटाए जा चुके (disposed of) मुख्य अयोध्या जमीन विवाद के तहत सुनने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी:“मुख्य अयोध्या मामला पहले ही निपटाया जा चुका है। आप इसमें सीधे इस प्रकार की अंतरिम अर्जी दाखिल नहीं कर सकते। यदि आप ट्रस्ट के पुनर्गठन या प्रबंधन को चुनौती देना चाहते हैं, तो इसके लिए कानून के तहत अलग और उचित याचिका दाखिल करें।”
इसका सीधा तात्पर्य यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े की मांगों के गुण-दोष (Merits) पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है, बल्कि केवल प्रक्रियात्मक आधार पर इस आवेदन को खारिज करते हुए उन्हें नई याचिका दाखिल करने की छूट दी है।
दान की कथित हेराफेरी मामले में SIT को सख्त निर्देश
शीर्ष अदालत ने इसी विषय से जुड़ी एक अन्य सुनवाई के दौरान राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित हेराफेरी की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को अपनी जांच जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने निर्देश दिया कि एसआईटी अपनी प्रगति रिपोर्ट बंद लिफाफे में सीधे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दान चोरी की आपराधिक जांच को मूल राम जन्मभूमि भूमि विवाद से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, लेकिन एसआईटी जांच को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सुझावों का स्वागत है।
FAQ Section
प्रश्न 1: निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट क्यों गया था?
उत्तर: निर्मोही अखाड़ा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव करने, उसे सार्वजनिक (Public Trust) घोषित करने तथा मंदिर प्रबंधन में 2019 के फैसले के तहत अपनी समुचित भूमिका तय करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
प्रश्न 2: क्या सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े की याचिका पूरी तरह खारिज कर दी?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने मांगों के गुण-दोष पर फैसला देने के बजाय केवल निपटाए जा चुके अयोध्या केस में अर्जी स्वीकार करने से मना किया है और अखाड़े को अलग से नई याचिका दाखिल करने का विकल्प दिया है।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध अदालती कार्यवाहियों, जनहित याचिकाओं और समाचार रिपोर्टों के आधार पर केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी पक्ष या धार्मिक संगठन की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है।
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