नई दिल्ली. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की 19 जनवरी 2026 की भारत यात्रा कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से ऐतिहासिक रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति अल नाहयान के बीच हुई इस मुलाकात में 12 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेंगे।
1. द्विपक्षीय व्यापार: $200 बिलियन का नया लक्ष्य
भारत और UAE ने अपने व्यापारिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने का संकल्प लिया है।
-
लक्ष्य: 2022 के CEPA समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार पहले ही $100 बिलियन पार कर चुका है। अब दोनों देशों ने 2032 तक इसे $200 बिलियन करने का लक्ष्य रखा है।
-
प्रभाव: इससे भारतीय निर्यातकों, विशेषकर MSME क्षेत्र के लिए खाड़ी देशों और उससे आगे अफ्रीका तक के बाजार खुलेंगे।
2. ऊर्जा सुरक्षा: 10 साल का LNG समझौता
ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने अपनी दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित की है।
-
समझौता: HPCL और ADNOC Gas के बीच प्रति वर्ष 0.5 मिलियन टन LNG आपूर्ति के लिए 10 साल का समझौता हुआ है (जो 2028 से शुरू होगा)।
-
परमाणु ऊर्जा: नागरिक परमाणु सहयोग के तहत दोनों देश ‘स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर’ (SMR) और परमाणु संयंत्रों के रखरखाव में साझेदारी करेंगे।
3. अंतरिक्ष और तकनीक: नए क्षितिज की ओर
भारत और UAE अब केवल व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में भी सहयोगी हैं।
-
स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर: भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) और UAE स्पेस एजेंसी के बीच अंतरिक्ष अवसंरचना के विकास और उसके व्यावसायीकरण के लिए समझौता हुआ है।
-
AI और सुपरकंप्यूटिंग: भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर सहमति बनी है, जो ‘AI इंडिया मिशन’ का हिस्सा होगा।
4. बुनियादी ढांचा और निवेश (Dholera & GIFT City)
UAE भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है।
-
धोलेरा (Dholera): गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र के विकास में UAE सहयोग करेगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और स्मार्ट टाउनशिप शामिल हैं।
-
GIFT City: UAE के First Abu Dhabi Bank और DP World ने गिफ्ट सिटी में अपने कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे भारत एक वैश्विक वित्तीय हब के रूप में उभरेगा।
समझौतों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
-
विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि: UAE भारत में सातवां सबसे बड़ा निवेशक है। नए समझौतों से इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश आएगा।
-
रोजगार सृजन: डिजिटल इकोनॉमी, अंतरिक्ष और विनिर्माण क्षेत्र में साझेदारी से लाखों कुशल युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।
-
लागत में कमी: ऊर्जा समझौतों और लॉजिस्टिक्स (जैसे भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा) से व्यापार की लागत कम होगी।
निष्कर्ष: यह यात्रा ‘कार डिप्लोमेसी’ से कहीं अधिक थी। इसने यह सिद्ध कर दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और UAE एक-दूसरे के सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार हैं।
Matribhumisamachar


