नई दिल्ली. 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री से अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को बड़े प्रोत्साहन की उम्मीद है। भारत वर्तमान में अपनी कुल बिजली क्षमता का 50% से अधिक गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त कर रहा है, लेकिन ‘नेट जीरो’ के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए अभी एक लंबी छलांग बाकी है। इनमें से रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर न केवल भारत की, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को पाने के लिए यह बजट एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है।
1. पीएम सूर्य घर योजना का विस्तार
सरकार की महात्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ को इस बजट में भारी आवंटन मिल सकता है। लक्ष्य 1 करोड़ घरों को सोलर से जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सब्सिडी का दायरा बढ़ाकर मध्यम वर्ग को और अधिक आकर्षित किया जा सकता है।
2. ‘एनर्जी स्टोरेज’ और बैटरी पर फोकस
सौर और पवन ऊर्जा के साथ सबसे बड़ी चुनौती बिजली को ‘स्टोर’ करने की है। बजट 2026 में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए Viability Gap Funding (VGF) और जीएसटी दरों में कटौती की उम्मीद है। अभी बैटरी स्टोरेज पर जीएसटी अधिक है, जिसे घटाकर 5% या शून्य करने की मांग उठ रही है।
3. घरेलू विनिर्माण (PLI 2.0)
चीन पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार सोलर इनगॉट्स, वेफर्स और पॉलीसिलिकॉन के निर्माण के लिए PLI (उत्पादन से जुड़ा प्रोत्साहन) योजना के दूसरे चरण की घोषणा कर सकती है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे।
4. ग्रीन हाइड्रोजन और स्मॉल न्यूक्लियर रिएक्टर (SMR)
भारत को ‘ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब’ बनाने के लिए बजट में विशेष इंसेंटिव दिए जा सकते हैं। इसके अलावा, कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए लघु परमाणु रिएक्टरों (Small Modular Reactors) के लिए नीतिगत ढांचे और फंडिंग का ऐलान भी संभव है।
5. ग्रीन क्रेडिट और टैक्स छूट
कॉर्पोरेट जगत को सस्टेनेबल प्रैक्टिस अपनाने के लिए 200% तक ग्रीन क्रेडिट देने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के लिए आसान कर्ज (Green Finance) उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।
चुनौतियां जो बजट से समाधान चाहती हैं:
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ग्रिड आधुनिकिकरण: बढ़ती रिन्यूएबल क्षमता को संभालने के लिए पुराने बिजली ग्रिड को स्मार्ट बनाना जरूरी है।
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कस्टम ड्यूटी: सोलर सेल के आयात पर लगने वाली ड्यूटी और घरेलू उपलब्धता के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञ की राय: “बजट 2026 केवल लक्ष्यों के बारे में नहीं, बल्कि जमीन पर क्रियान्वयन (Execution) के बारे में होना चाहिए। यदि स्टोरेज और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया गया, तो भारत क्लीन एनर्जी का ग्लोबल लीडर बन जाएगा।”
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