नई दिल्ली. दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता, भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बाद अपनी ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है। सरकार ने नॉन-होरमुज (Non-Hormuz) रास्तों से अपनी क्रूड ऑयल सप्लाई को बढ़ाकर 70% कर दिया है, जो पहले मात्र 55% थी। यह बदलाव न केवल रणनीतिक है, बल्कि भारत को वैश्विक तेल राजनीति के केंद्र में ले आया है।
1. रूस: ‘इमरजेंसी’ में फिर बना संकटमोचक
हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत को दिए गए 30 दिनों के विशेष ‘वेवर’ (Waiver) के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद में भारी बढ़ोतरी की है।
-
3 करोड़ बैरल का सौदा: मार्च 2026 में भारतीय रिफाइनरियों (IOC और रिलायंस) ने समुद्र में फंसे करीब 30 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल को खरीदने का बड़ा सौदा किया है।
-
आयात में 50% उछाल: पिछले कुछ महीनों की गिरावट के बाद, मार्च में रूसी तेल की आवक में फिर से 50% की वृद्धि दर्ज की गई है।
-
15 लाख बैरल प्रतिदिन: भारत वर्तमान में रूस से लगभग 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्रूड ऑयल हासिल कर रहा है।
2. होरमुज का विकल्प: सुरक्षित समुद्री रास्तों पर फोकस
होरमुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का 20% तेल और गैस गुजरता है, वर्तमान में युद्ध के कारण अत्यधिक जोखिम में है।
-
70% सुरक्षित रूट: भारत का अब 70% कच्चा तेल उन रास्तों से आ रहा है जो होरमुज के संकटपूर्ण क्षेत्र से बाहर हैं।
-
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका: अंगोला, ब्राजील, गुयाना और कोलंबिया से भारत ने 70 लाख बैरल (Spot Purchase) तेल मंगवाया है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह मिडिल ईस्ट के बाहर अपने नए स्थायी साझेदार तलाश रहा है।
3. LNG और LPG: अमेरिका के साथ ऐतिहासिक साझेदारी
प्राकृतिक गैस और रसोई गैस (LPG) के मामले में भारत ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है:
-
LPG का नया मॉडल: भारत ने अमेरिका से सालाना 2.2 मिलियन टन (MMTPA) LPG आयात का पहला संरचित कार्यक्रम शुरू किया है। यह अब सऊदी अरब की कीमतों के बजाय अमेरिकी ‘मोंट बेल्वीय’ (Mont Belvieu) इंडेक्स पर आधारित होगा।
-
घरेलू प्राथमिकता: पेट्रोलियम मंत्रालय ने ‘नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर’ जारी कर रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे LPG उत्पादन में 28% की वृद्धि करें ताकि 33.3 करोड़ घरेलू कनेक्शनों को सप्लाई बाधित न हो।
-
LNG के नए ठिकाने: कतर पर निर्भरता कम करते हुए अब ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे और अल्जीरिया से बड़े LNG कार्गो सीधे भारतीय बंदरगाहों पर पहुँच रहे हैं।
4. डेटा अब ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा
भारत सरकार ने 18 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया है:
-
पेट्रोलियम सूचना आदेश 2026: अब सभी तेल कंपनियों (सरकारी और निजी) के लिए अपने आयात, स्टॉक और खपत का दैनिक डेटा सरकार को देना अनिवार्य होगा।
-
अनिवार्यता: इसे ‘अनिवार्य वस्तु अधिनियम 1955’ के तहत लागू किया गया है, ताकि सरकार रियल-टाइम में सप्लाई चैन की निगरानी कर सके।
📌 मुख्य बिंदु: भारत की नई ऊर्जा स्थिति
| मानक | पहले (औसत) | अब (मार्च 2026) |
| होरमुज रूट पर निर्भरता | 45-50% | घटकर ~30% |
| रूस से आयात | 20-22% | फिर से बढ़कर ~30% (वेवर के बाद) |
| अमेरिका से ऊर्जा डील | मध्यम | $500 बिलियन का लॉन्ग-टर्म लक्ष्य |
| LPG घरेलू उत्पादन | सामान्य | 28% की अतिरिक्त बढ़ोतरी |
🧭 निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
भारत की ऊर्जा रणनीति अब केवल ‘खरीद’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘जियोपॉलिटिकल बैलेंसिंग’ का एक बेहतरीन उदाहरण है। एक तरफ भारत अमेरिका के साथ 500 अरब डॉलर के ऊर्जा सौदे कर रहा है, तो दूसरी तरफ रूस से रियायती तेल लेकर अपने नागरिकों को महंगाई से बचा रहा है। पश्चिम एशिया का तनाव भारत को कमजोर करने के बजाय उसे ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक लचीला (Resilient) बना रहा है।
Matribhumisamachar


