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वीएचपी केंद्रीय प्रबंध समिति बैठक अयोध्या: धर्मांतरण, लव जिहाद और मंदिरों की मुक्ति पर बनेगी राष्ट्रव्यापी रणनीति

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अयोध्या। शुक्रवार, 19 जून 2026

रामनगरी अयोध्या एक बार फिर देश की सांस्कृतिक और सामाजिक नीति-निर्धारण का केंद्र बनने जा रही है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) की सर्वोच्च और सबसे महत्वपूर्ण नीति-निर्धारक इकाई, ‘केंद्रीय प्रबंध समिति’ की चार दिवसीय राष्ट्रीय बैठक आगामी 26 जून से 29 जून 2026 तक अयोध्या धाम के रामसेवक पुरम स्थित विहिप यात्री निवास में आयोजित होने जा रही है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में देश भर से संगठन के 450 से अधिक राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और प्रांतीय पदाधिकारी भाग लेंगे। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने खुद अयोध्या पहुंचकर इस वृहद बैठक की तैयारियों और व्यवस्थाओं (आवास, सुरक्षा, भोजन और यातायात) की समीक्षा की है।

34 वर्षों के इतिहास में यह केवल दूसरी बार है जब विहिप अपनी इस शीर्ष प्रबंध समिति की बैठक अयोध्या में आयोजित कर रही है। इससे पहले वर्ष 2024 में रामलला की ऐतिहासिक प्राण-प्रतिष्ठा के समय इतनी बड़ी संख्या में पदाधिकारी यहाँ जुटे थे। भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या अब हिंदू समाज के गौरव और राष्ट्रव्यापी अभियानों का मुख्य केंद्र बन चुकी है, जिससे इस बैठक का महत्व और भी बढ़ जाता है।

किन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहेगा विहिप का एजेंडा?

संगठन के वरिष्ठ सूत्रों और राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल के अनुसार, इस चार दिवसीय महामंथन के दौरान हिंदू समाज से जुड़े कई ज्वलंत और दूरगामी प्रभाव वाले विषयों पर गंभीर समीक्षा की जाएगी:

1. धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कड़े कानून की मांग

विहिप का मानना है कि देश के कई हिस्सों में अवैध धर्मांतरण और कथित ‘लव जिहाद’ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस बैठक में विभिन्न राज्यों में वर्तमान में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों की प्रभावशीलता की समीक्षा की जाएगी। संगठन का मुख्य लक्ष्य केंद्र और सभी राज्य सरकारों पर इसके खिलाफ और अधिक कड़े व प्रभावी कानून बनाने के लिए दबाव डालना है। इसके लिए एक देशव्यापी जनजागरण अभियान छेड़ने की योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

2. ‘भूमि जिहाद’ और ‘मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने’ का मुद्दा

इस बार विहिप के एजेंडे में दो नए और बेहद संवेदनशील मुद्दे भी शीर्ष पर हैं। पहला है ‘भूमि जिहाद’ से जुड़े मामलों पर संगठन का दृष्टिकोण तय करना, और दूसरा है देश के ऐतिहासिक हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त (Liberation of Temples from Government Control) कराने की मांग को तेज करना। विहिप का तर्क है कि जब अन्य धर्मों के पूजा स्थलों को स्वायत्तता प्राप्त है, तो हिंदू मंदिरों पर सरकारी तंत्र का नियंत्रण क्यों होना चाहिए।

3. सामाजिक समरसता और दलित समाज तक पहुंच (संत रविदास जयंती)

संगठन समाज के भीतर की जातिगत दूरियों को पाटने के लिए ‘सामाजिक समरसता’ अभियान को और मजबूत करेगा। इसके तहत भक्ति आंदोलन के महान संत, कवि और समाज सुधारक संत रविदास जी की 650वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से मनाने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके माध्यम से विहिप का उद्देश्य समाज के वंचित और दलित वर्गों तक अपनी सीधी पहुंच स्थापित करना है।

4. स्वर्गीय अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष

राम जन्मभूमि आंदोलन के महानायक और विहिप के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल जी का जन्म शताब्दी वर्ष (27 सितंबर को आगामी कार्यक्रम) आने वाला है। इस बैठक में उनके जीवन मूल्यों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देशव्यापी सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला तय की जाएगी।

क्या होगी विहिप की आगामी संगठनात्मक रणनीति?

बैठक में लिए गए निर्णयों का सीधा असर देश भर में चलाए जाने वाले आगामी अभियानों पर दिखेगा। संगठन अपनी जड़ों को और मजबूत करने के लिए निम्नलिखित द्विआयामी रणनीति पर काम कर रहा है:

  • स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं का सुदृढ़ीकरण: विहिप अपने अनुषांगिक संगठनों जैसे बजरंग दल (युवाओं के लिए), दुर्गावाहिनी और मातृशक्ति (महिलाओं के लिए) के वार्षिक प्रशिक्षण वर्गों के माध्यम से लाखों युवाओं को राष्ट्र सेवा और सामाजिक सुरक्षा के संकल्प से जोड़ेगी।

  • ग्रामीण भारत तक विस्तार: संगठन की योजना महानगरों से निकलकर देश के हर जिले, प्रखंड, कस्बों और सुदूर गांवों तक नई इकाइयों का गठन करने की है, ताकि सेवा कार्यों का लाभ समाज के सबसे गरीब और वंचित व्यक्ति तक पहुंच सके।

विशेष नोट: हाल ही में अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की दान राशि से जुड़े कुछ विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच से पूरा सच सामने आएगा। उन्होंने दोहराया कि प्रभु राम के मंदिर के एक-एक पैसे की पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट पूरी तरह उत्तरदायी है और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी अनिवार्य है।

प्रासंगिक कड़ियाँ और संदर्भ (External Links)

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