अहमदाबाद । शुक्रवार, 19 जून 2026
12 जून, 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के महज 32 सेकंड बाद क्रैश हुई एयर इंडिया की बोइंग फ्लाइट एआई-171 (Air India AI-171) मामले में एक बड़ा सनसनीखेज मोड़ आ गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने इस विमान हादसे की आधिकारिक अंतरिम रिपोर्ट के दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे चुनौती दी है।
जहां एक तरफ सरकारी जांचकर्ताओं की शुरुआती थ्योरी में इसे पायलटों का ‘सुसाइड पैक्ट’ (आत्महत्या की सोची-समझी योजना) बताया जा रहा था, वहीं FIP के नए सिम्युलेटर डेटा ने इस थ्योरी को तकनीकी और भौतिक रूप से असंभव करार दिया है। FIP का दावा है कि क्रैश की असली वजह पायलटों की गलती नहीं, बल्कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के सिस्टम में आई एक बड़ी मैकेनिकल और बिजली की खराबी (Catastrophic Electrical Failure) थी।
क्या है सरकारी अंतरिम रिपोर्ट और ‘आत्महत्या’ की थ्योरी?
हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उड़ान भरने के तुरंत बाद फ्लाइट-क्रू ने जानबूझकर दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई (फ्यूल कंट्रोल स्विच) को ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ पर सेट कर दिया था।
सरकारी जांचकर्ताओं के अनुसार, इस मैनुअल शटडाउन के ठीक 4 से 5 सेकंड बाद विमान का ‘रैम एयर टर्बाइन’ (Ram Air Turbine – RAT) नीचे गिर गया (Deploy हो गया)। RAT एक ऐसा बैकअप पावर सिस्टम है जो विमान में पूरी तरह से बिजली चले जाने की स्थिति में हवा के दबाव से घूमकर आपातकालीन बिजली और हाइड्रोलिक प्रेशर जेनरेट करता है। जांचकर्ताओं ने इसी 4 सेकंड की टाइमलाइन को आधार बनाकर इसे पायलटों की जानबूझकर की गई कार्रवाई बताया था।
FIP के सिम्युलेटर टेस्ट ने आधिकारिक टाइमलाइन को किया खारिज
FIP के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि फेडरेशन ने हाल ही में उस मनहूस उड़ान (AI-171) के सटीक वजन, बैलेंस, हवा की गति और मौसम की स्थितियों को हूबहू री-क्रिएट करते हुए विस्तृत बोइंग 787 सिम्युलेटर टेस्ट किए हैं। इन टेस्ट के नतीजे सरकारी रिपोर्ट से बिल्कुल अलग हैं:
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18 सेकंड बनाम 4 सेकंड: FIP के सिम्युलेटर परीक्षणों से साबित हुआ है कि यदि पायलट मैनुअल रूप से ईंधन की सप्लाई बंद करते हैं, तो बैकअप टर्बाइन (RAT) को नीचे गिरने में पूरे 18 सेकंड का समय लगता है।
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भौतिक रूप से असंभव: कैप्टन रंधावा के अनुसार, मैनुअल शटडाउन की स्थिति में मात्र 4 सेकंड के भीतर टर्बाइन का एक्टिवेट हो जाना भौतिक और तकनीकी नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।
बिजली की खराबी (Electrical Failure) की थ्योरी को मिला बल
FIP का तर्क है कि बैकअप टर्बाइन इतनी तेजी से (सिर्फ 4 सेकंड में) इसलिए खुला क्योंकि इंजन बंद होने से पहले ही विमान में अचानक भारी बिजली की खराबी आ चुकी थी। इसी व्यापक सिस्टम विफलता (Systemic Glitch) के कारण इंजन के स्विच ट्रिप हो गए और दोनों इंजनों ने काम करना बंद कर दिया।
चश्मदीद गवाह का बड़ा बयान: इस भीषण हादसे में बचे एकमात्र भाग्यशाली यात्री, ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश (जो सीट 11A पर बैठे थे) ने भी इस थ्योरी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया था कि विमान के नीचे गिरने (Terminal Descent) से ठीक पहले केबिन की लाइटें लगातार टिमटिमा (Flicker) रही थीं और धीमी हो रही थीं। यह बयान अचानक और बड़े पैमाने पर पावर फेलियर होने के FIP के दावों से बिल्कुल मेल खाता है।
‘मृत पायलटों पर दोष मढ़ना आसान’—विशेषज्ञों को दूर रखने का आरोप
पायलटों के संघ ने जांच की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान में इस घातक उड़ान से पहले भी बिजली की अनसुलझी तकनीकी समस्याओं का पुराना रिकॉर्ड रहा था।
FIP ने आरोप लगाया कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और सरकारी जांचकर्ताओं ने भारत के सबसे वरिष्ठ और शीर्ष बोइंग 787 एक्सपर्ट माने जाने वाले कैप्टन आरएस संधू को वास्तविक जांच परीक्षणों से जानबूझकर अलग रखा।
कैप्टन रंधावा ने कड़े शब्दों में कहा:
“वे हमारे सबसे अनुभवी पायलटों की राय को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, क्योंकि उनकी तकनीकी जानकारी सामने आने से जांच एजेंसियों की ‘पायलट सुसाइड’ वाली थ्योरी पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। किसी बड़ी मैकेनिकल या सॉफ्टवेयर खराबी के लिए बोइंग या सिस्टम को जिम्मेदार ठहराने के बजाय, उन मृत पायलटों पर दोष मढ़ देना सबसे आसान रास्ता है जो अब खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए जीवित नहीं हैं।”
FIP की मांग: अंतिम रिपोर्ट के प्रकाशन पर तुरंत लगे रोक
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पुष्टि की है कि उन्होंने अपने सिम्युलेटर टेस्ट का पूरा डेटा, ग्राफिक्स और तकनीकी निष्कर्ष आधिकारिक तौर पर बोइंग (Boeing) और भारत की सरकारी एविएशन अथॉरिटीज को सौंप दिए हैं।
FIP की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
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जब तक टर्बाइन डिप्लॉयमेंट (RAT) से जुड़ी इस 14 सेकंड की गणितीय और तकनीकी गड़बड़ी की पूरी पारदर्शी जांच नहीं हो जाती, तब तक दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट के प्रकाशन पर तुरंत रोक लगाई जाए।
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जांच टीम में कैप्टन आरएस संधू को तुरंत शामिल किया जाए ताकि डेटा की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के अनुसार, जांच अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन FIP के इन नए वैज्ञानिक साक्ष्यों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और बोइंग विमान के इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर की नए सिरे से जांच के आदेश देते हैं या नहीं।
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