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अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामला: SIT रिपोर्ट में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को बड़ी राहत, दान प्रबंधन की खामियों पर सख्त टिप्पणी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
अयोध्या । बुधवार, 19 अगस्त 2026
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े दान प्रबंधन मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट के आने से ट्रस्ट के प्रमुख सदस्यों, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। SIT ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि दान राशि में हुई कथित गड़बड़ी या चोरी के मामले में इन दोनों अधिकारियों की कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं पाई गई है।

पूछताछ के बाद मिली राहत

मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT की टीम ने जांच प्रक्रिया के तहत चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा से गहन पूछताछ की थी। सभी दस्तावेजों, बही-खातों और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड खंगालने के बाद जांच एजेंसी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ प्रत्यक्ष आपराधिक संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसके बाद ही उन्हें इस मामले में आरोपी न बनाने का निर्णय लिया गया।

दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में सामने आईं खामियां

हालांकि दोनों प्रमुख पदाधिकारियों को क्लीन चिट/राहत मिल गई है, लेकिन SIT ने मंदिर में आने वाले दान के प्रबंधन, गिनती और संग्रह की मौजूदा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि:
  • गिनती प्रक्रिया में ढिलाई: दान पेटियों से राशि निकालने और उसकी गिनती करने के दौरान निगरानी और सुरक्षा से जुड़ी कुछ व्यावहारिक कमियां मौजूद थीं।
  • सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता: भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी रोकने के लिए दान संग्रह की व्यवस्था में कड़े बदलाव और ऑडिटिंग सुधार लागू करने की आवश्यकता जताई गई है।

अन्य आरोपियों पर कानूनी शिकंजा बरकरार

जांच एजेंसी ने साफ किया है कि भले ही ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों को प्रत्यक्ष रूप से दोषी नहीं पाया गया हो, लेकिन दान राशि में हेरफेर करने में शामिल कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी है। पुलिस और जांच एजेंसियां मामले में शामिल निचले स्तर के संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

आगे क्या होगी प्रक्रिया?

SIT की ओर से रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद अब संबंधित प्रशासनिक व न्यायिक स्तर पर इस पर विचार किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दान प्रबंधन प्रणाली में नए सुरक्षा मानक लागू किए जा सकते हैं। वहीं अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चल रही न्यायिक प्रक्रिया अपनी तय समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. SIT रिपोर्ट में किसे राहत मिली है?
उत्तर: एसआईटी की जांच रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को प्रत्यक्ष संलिप्तता न पाए जाने पर आरोपी नहीं बनाया गया है।
Q2. क्या राम मंदिर दान मामले की पूरी जांच बंद हो गई है?
उत्तर: नहीं, जांच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मामले में शामिल अन्य संदिग्धों और आरोपियों के खिलाफ आपराधिक जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
Q3. SIT की रिपोर्ट में मुख्य निष्कर्ष क्या रहे?
उत्तर: SIT ने शीर्ष पदाधिकारियों को राहत देते हुए दान प्रबंधन, गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में पाई गईं तकनीकी खामियों को सुधारने पर जोर दिया है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार लेख उपलब्ध प्राथमिक सूचनाओं और SIT जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर आधारित है। मामले से जुड़ी आगे की विधिक कार्रवाई और अंतिम फैसले न्यायालय व संबंधित शासन के निर्णयों के अधीन रहेंगे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।