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सावधान! आज से लगा अग्नि पंचक, 5 दिनों तक भूलकर भी न करें ये काम

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नई दिल्ली. हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले शुभ मुहूर्त और पंचांग देखने की परंपरा है। आज मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। आज का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज से ‘पंचक’ का प्रारंभ हो रहा है। मंगलवार से शुरू होने के कारण इसे अग्नि पंचक कहा जाता है।

आज का पंचांग (Panchang Today)

  • तिथि: प्रतिपदा (शुक्ल पक्ष, माघ मास)

  • दिन: मंगलवार

  • नक्षत्र: श्रवण (उसके बाद धनिष्ठा, जिससे पंचक शुरू होगा)

  • आज का शुभ मुहूर्त (Abhijit Muhurat): दोपहर 12:11 PM से 12:52 PM तक।

  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 03:00 PM से 04:30 PM तक (इस दौरान शुभ कार्य वर्जित हैं)।

क्या है पंचक और ‘अग्नि पंचक’ का प्रभाव?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में विचरण करता है, तो उस अवधि को पंचक कहा जाता है।

चूँकि आज मंगलवार है, इसलिए आज से शुरू होने वाला पंचक ‘अग्नि पंचक’ कहलाएगा। अग्नि पंचक के दौरान आग लगने का भय अधिक रहता है, इसलिए निर्माण कार्य और मशीनरी से जुड़े कार्यों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

पंचक के दौरान वर्जित कार्य (भूलकर भी न करें ये काम)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के 5 दिनों में कुछ कार्यों को करना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इनका पांच गुना बुरा प्रभाव पड़ सकता है:

  1. लकड़ी का संचय: पंचक के दौरान लकड़ी इकट्ठा करना या खरीदना वर्जित है।

  2. घर की छत डालना: इस अवधि में घर का लिंटर या छत नहीं डालनी चाहिए, ऐसा करने से धन हानि या अग्नि का भय रहता है।

  3. चारपाई/पलंग बनाना: पंचक में नई चारपाई बुनना या पलंग खरीदना अशुभ माना जाता है।

  4. दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए।

  5. अंतिम संस्कार: यदि पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए, तो उसके दाह संस्कार के समय विशेष शांति पूजन (5 पुतले बनाकर) किया जाना अनिवार्य है।

आज के विशेष योग

आज अभिजीत मुहूर्त में आप हनुमान जी की पूजा और दान-पुण्य जैसे कार्य कर सकते हैं। अग्नि पंचक होने के कारण आज आग, बिजली और औजारों के इस्तेमाल में लापरवाही न बरतें।

ज्योतिषीय सलाह: यदि कोई कार्य बहुत अनिवार्य हो और उसे टाला न जा सके, तो विद्वान पंडित से सलाह लेकर या गायत्री मंत्र का जाप करके कार्य की शुरुआत की जा सकती है।

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