फेंग-शुई शास्त्र में सबकुछ “ची” अर्थात् सकारात्मक ऊर्जा पर आधारित है। आपकी उन्नति या अवनति में जहाँ भाग्य व कर्म का हाथ होता है। वहीं वास्तु के शास्त्र को नकारा नहीं जा सकता है। लेकिन ईश्वर द्वारा मिले भाग्य को बदलना हाथ में नहीं है लेकिन कर्म द्वारा संवारा जा सकता है। उसी प्रकार घर, व्यवसाय, फैक्ट्री में पहले सुख, शान्ति एवं समृद्धि थी। वहाँ पर वास्तुदोष बताकर तोड़फोड़ करना उचित नहीं है। केवल उपस्थित दोष के निवारण के लिये साधारण से उपाय अपनाकर इन दोषों को दूर किया जा सकता है।
वास्तुशास्त्र में पूर्व दिशा वंश वृद्धि, पश्चिम दिशा सफलता कीर्ति एवं ऐश्वर्य, उत्तर दिशा ज्ञान के लिये, दक्षिण दिशा धन धान्य समृद्धि प्रसन्नता, ईशानकोण ईश्वर से जुड़ाव, ईश्वर कृपा, वायव्य कोण मित्रता एवं शत्रुता, आग्नेय कोण क्रोध, अग्नि, रसोईघर नैऋत्यकोण आचार-विचार का कारक है।
१. दरवाजे के ठीक सामने एवं प्रवेश द्वार की ओर पैर करके कभी नहीं सोना चाहिये।
२. दर्पण में डाइनिंग टेबल का प्रतिबिम्ब दिखना चाहिये।
३. रेगिस्तानी कांटेदार वृक्ष होने पर घर के लोगों को रक्तचाप, हृदयविकार रहता है।
४. बिना जरूरत वाली वस्तुएं घर में नहीं रखनी चाहिये।
५. फेंग-शुई के ३ टाँगों वाले मेढक को घर में विधिपूर्वक अभिमंत्रित करवाकर स्थापित करें।
६. मंगलकारी एवं शुभचिन्हों स्वास्तिक, ऊँ, त्रिशूल का सही विधि से प्रयोग करें।
७. घर में हँसते हुये बुद्ध की मूर्ति समुचित दिशा में लगाये।
८. ऊपरी मंजिल वाला फ्लैट न लें, यदि ले लिया है तो वास्तु सुधार करवायें।
९. सपरिवार प्रसन्नचित मुद्रा वाला चित्र सही दिशा में लगवायें।
१०. समृद्धिदायक स्फटिक गोले को शुद्ध करके सही दिशा में स्थापित करें।
११. मछलीघर को शयनकक्ष में न रखें। किसी योग्य विद्वान से मछलीघर की दिशा पूछ लें।
११. दोपहर के बाद की सूर्य की किरणें रोकने के लिये उपाय करें।
१२. अपने सिर को उत्तर की ओर और पैरों को दक्षिण की ओर करके न सोयें।
१३. यदि आपकी कुण्डली में बृहस्पति खराब है। तो आपके निवास का उत्तर, उत्तर पूर्व कोना दूषित होगा। अतः वास्तु के साथ-साथ अपनी कुण्डली का भी किसी योग्य विद्वान से विश्लेषण करवाना चाहिये।
१४. व्यवसायिक स्थल में मुखिया का चित्र दक्षिण दिशा में लगाना चाहिये, कम्पनी व उत्पाद का नाम लाल रंग के अक्षरों में दक्षिण क्षेत्र में लगाना चाहिये।
१५. अपने मोबाइल को अग्निकोण, या ईशानकोण, या पूर्व में रखना चाहिये।
१६. लक्ष्मी प्राप्ति के लिये भाग्यशाली सिक्कों को शुद्ध करवाकर लाल रंग के धागे में बाँधकर अपने पर्स में रखना चाहिये।
१७. घर में कोई वास्तुदोष होने पर घर के मुख्य द्वार पर शुक्लपक्ष के प्रथम बृहस्पतिवार को श्री विष्णु भगवान् के वास्तु शान्ति मंत्र से अभिमंत्रित किये चित्र को लगाने से वास्तु दोष दूर होने लगता है।
१८. ऋग्वेद में दिये भगवान कृष्ण के वास्तु दोष नाशक मंत्र का पाठ गृहस्वामी द्वारा महिने में एक बार करने से वास्तुदोष समाप्त हो जाते है। मंत्र पूछ लें।
अधिक जानकारी के लिए आप ज्योतिषाचार्य श्याम जी शुक्ल (मो. : 8808797111) से भी संपर्क कर सकते हैं.
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