तेहरान. मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व) इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान के भीतर भड़की विद्रोह की आग अब अंतरराष्ट्रीय सैन्य तनाव में बदल चुकी है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) द्वारा पहली बार “हजारों मौतों” की बात स्वीकार करने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनी के बाद दुनिया की नजरें अब तेहरान पर टिकी हैं।
1. आंतरिक संकट: 1979 की क्रांति के बाद सबसे बड़ी चुनौती
दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने जनवरी 2026 में हिंसक रूप ले लिया है। मानवाधिकार संगठनों (जैसे HRANA) के अनुसार, अब तक 3,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है, जबकि 24,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
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खामेनेई का कबूलनामा: शनिवार (17 जनवरी) को दिए अपने भाषण में खामेनेई ने माना कि “हजारों लोग” मारे गए हैं, लेकिन उन्होंने इसका दोष प्रदर्शनकारियों पर न मढ़कर सीधे अमेरिका और इजरायल को ‘साजिशकर्ता’ करार दिया।
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इंटरनेट ब्लैकआउट: प्रशासन ने 8 जनवरी से ही देश में इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी है, जिससे जमीनी हालात की सटीक जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गई है।
2. मिडिल ईस्ट में सैन्य हलचल: युद्ध की तैयारी?
ईरान के भीतर अस्थिरता को देखते हुए मध्य-पूर्व के सैन्य समीकरण तेजी से बदल रहे हैं:
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अमेरिकी बेड़े की मूवमेंट: दक्षिण चीन सागर से अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा (Carrier Strike Group) फारस की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है।
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ईरान की सीमा पर तैनाती: जवाबी कार्रवाई के डर से ईरान ने अपने 5 लाख सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा है और अपनी सीमाओं पर ‘एयर डिफेंस सिस्टम’ तैनात कर दिए हैं।
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हवाई क्षेत्र बंद: कतर, बहरीन और यूएई जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। ईरान ने एहतियातन अपना एयरस्पेस कई नागरिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया है, जिससे भारत (Air India) सहित कई देशों की उड़ानें प्रभावित हो रही हैं।
3. ट्रंप बनाम खामेनेई: जुबानी जंग या मिलिट्री एक्शन?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हालिया बयानों में ईरान में “नए नेतृत्व” (New Leadership) की मांग की है।
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ट्रंप का कड़ा रुख: ट्रंप ने खामेनेई को ‘अपराधी’ और ‘बीमार व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि वह अपने ही देश को तबाह कर रहे हैं।
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डिप्लोमेसी या हमला: वाशिंगटन में इस बात पर बहस तेज है कि क्या अमेरिका को प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने के लिए सीमित सैन्य हमले (Surgical Strikes) करने चाहिए।
4. भारत पर क्या होगा असर?
भारत के लिए यह संकट दोधारी तलवार जैसा है:
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कच्चा तेल: खाड़ी में तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा है।
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चाबहार पोर्ट: ईरान में अस्थिरता भारत के रणनीतिक ‘चाबहार प्रोजेक्ट’ पर ब्रेक लगा सकती है।
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भारतीय समुदाय: खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा और उड़ानों के मार्ग में बदलाव एक बड़ी चुनौती है।
ईरान इस समय अपने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा है। एक तरफ घर के भीतर भड़का आक्रोश है और दूसरी तरफ दुनिया की महाशक्तियों का सैन्य दबाव। अगले 48 घंटे मध्य-पूर्व की नई दिशा तय कर सकते हैं।
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