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पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस प्रतिबंध मार्च 2026 तक बढ़ाया; एयरलाइंस को ₹7,000 करोड़ का नुकसान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

इस्लामाबाद. भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक कड़वाहट अब आसमान तक पहुँच गई है। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए भारतीय पंजीकृत विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) पर लगे प्रतिबंध को 23-24 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है।

अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद उपजे तनाव के कारण लगाया गया यह प्रतिबंध अब अपने लगातार 11वें महीने में प्रवेश कर चुका है।

? प्रतिबंध का मुख्य केंद्र

यह पाबंदी पाकिस्तान के दोनों प्रमुख फ्लाइट इंफॉर्मेशन क्षेत्रों (FIRs) पर लागू होगी:

  1. कराची FIR

  2. लाहौर FIR

इसका सीधा अर्थ यह है कि कोई भी भारतीय नागरिक या सैन्य विमान पाकिस्तान की सीमा के ऊपर से उड़ान नहीं भर सकेगा। जानकारों का मानना है कि भारत भी ‘जैसे को तैसा’ की नीति अपनाते हुए जल्द ही पाकिस्तानी एयरलाइंस के लिए अपने दरवाजे बंद रखने की समय सीमा बढ़ा सकता है।

? भारतीय एयरलाइंस पर ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’

इस हवाई पाबंदी ने भारतीय विमानन क्षेत्र की कमर तोड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • बढ़ा सफर, बढ़ी लागत: यूरोप और अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को अब अरब सागर के रास्ते लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है। इससे उड़ान के समय में 15 मिनट से लेकर 3 घंटे तक की बढ़ोतरी हुई है।

  • 7,000 करोड़ का बोझ: ईंधन की भारी खपत और ऑपरेशनल खर्चों के कारण भारतीय एयरलाइंस को सालाना करीब $1 बिलियन (₹7,000 करोड़) का आर्थिक नुकसान हो रहा है।

  • सुनसान हुए एयरपोर्ट: सीमावर्ती इलाकों, विशेषकर अमृतसर हवाई अड्डे पर यात्रियों की संख्या में 21% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

⚠️ यात्रियों के लिए क्या बदला?

यदि आप आने वाले महीनों में विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तैयार रहें:

  • महंगे टिकट: ईंधन की अतिरिक्त लागत का सीधा असर फ्लाइट टिकट की कीमतों पर दिख रहा है।

  • कनेक्टिंग फ्लाइट्स में देरी: लंबे रूट के कारण कई बार कनेक्टिंग फ्लाइट्स मिस होने का डर बना रहता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।