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भारत बना ‘पैक्स सिलिका’ अलायंस का हिस्सा: वैश्विक सेमीकंडक्टर और AI क्षेत्र में चीन के दबदबे को चुनौती

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अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर पैक्स सिलिका समझौते के दौरान।

नई दिल्ली. भारत ने आज वैश्विक तकनीकी कूटनीति के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई है। नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) अलायंस का हिस्सा बन गया है।

दिसंबर 2025 में अमेरिका द्वारा शुरू किया गया यह गठबंधन वैश्विक सेमीकंडक्टर (चिप), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है।

क्या है ‘Pax Silica’ और क्यों है यह खास?

इस गठबंधन का नाम इसके गहरे अर्थ को दर्शाता है:

  • Pax: इसका लैटिन अर्थ ‘शांति और स्थिरता’ है।

  • Silica: यह आधुनिक कंप्यूटर चिप्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल (सिलिकॉन) है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 महामारी और हालिया भू-राजनीतिक तनावों ने दुनिया को यह अहसास कराया कि तकनीकी उपकरणों के लिए किसी एक देश (विशेषकर चीन) पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। ‘पैक्स सिलिका’ इसी निर्भरता को खत्म कर एक ‘भरोसेमंद नेटवर्क’ तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

चीन के तकनीकी प्रभुत्व को चुनौती

हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य चीन के तकनीकी वर्चस्व को संतुलित करना है। ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अब तक चीन की भूमिका प्रमुख रही है, लेकिन भारत के इस समूह में शामिल होने से समीकरण बदलने वाले हैं। भारत अब इस क्षेत्र में एक नए वैश्विक केंद्र (Global Hub) के रूप में उभर रहा है।

गठबंधन के प्रमुख सदस्य

भारत अब उन शक्तिशाली देशों की सूची में शामिल हो गया है जो वैश्विक तकनीक की दिशा तय कर रहे हैं:

  • नेतृत्व: अमेरिका

  • सहयोगी: भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, इजरायल, ब्रिटेन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।

भारत के लिए ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत

अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर कहा कि यह गठबंधन भारत के ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। भारत को मिलने वाले प्रमुख लाभ:

  1. तकनीकी सहयोग: अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से चिप निर्माण की अत्याधुनिक तकनीक मिलेगी।

  2. भारी निवेश: वैश्विक कंपनियां अब भारत को एक सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में देखेंगी।

  3. AI स्टार्टअप्स को मजबूती: डिजाइन और रिसर्च के क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप्स के लिए नए वैश्विक बाजार खुलेंगे।

  4. सप्लाई चेन सुरक्षा: भविष्य में चिप्स या महत्वपूर्ण खनिजों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

भविष्य की ओर

भारत की डिजिटल इकोनॉमी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को देखते हुए, उसे इस समूह में शामिल होने का न्योता दिया जाना भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है। यह पहल न केवल भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि वैश्विक डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने में भी भारत की भूमिका निर्णायक होगी।

मातृभूमि समाचार – भारत का सेमीकंडक्टर मिशन

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