वाशिंगटन. जनवरी 2026 की नवीनतम घटनाओं के आधार पर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय नेताओं (विशेषकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों) के बीच का विवाद अब एक पूर्ण “राजनयिक और व्यापारिक युद्ध” में बदल चुका है। इस विवाद की सबसे ताज़ा कड़ी ट्रंप की नई पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) है। ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों (जैसे गाजा और यूक्रेन) को सुलझाने के लिए एक स्वतंत्र परिषद बनाई है, जिसमें शामिल होने के लिए सदस्य देशों को 1 बिलियन डॉलर की फीस देनी होगी।
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विवाद का कारण: फ्रांस ने इस बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया है। मैक्रों का तर्क है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र (UN) की संरचना को कमजोर करती है।
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ट्रंप की धमकी: जवाब में ट्रंप ने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200% आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा, “मैक्रों वैसे भी जल्द ही पद छोड़ने वाले हैं (2027 में), और टैरिफ लगते ही वे बोर्ड में शामिल होने के लिए दौड़ते हुए आएंगे।”
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निजी संदेश लीक: कूटनीतिक मर्यादा को दरकिनार करते हुए ट्रंप ने मैक्रों द्वारा भेजे गए एक निजी संदेश को भी सार्वजनिक कर दिया, जिसमें मैक्रों ने पेरिस में शांति वार्ता की मेजबानी का प्रस्ताव दिया था।
2. ग्रीनलैंड विवाद: संप्रभुता बनाम ‘रियल एस्टेट’
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने के अपने पुराने प्रस्ताव को अब राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे में बदल दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि जो देश अमेरिका के इस “ग्रीनलैंड मिशन” का विरोध करेंगे, उन्हें भारी आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।
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टैरिफ का समय चक्र: 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड और नीदरलैंड पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा।
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अल्टीमेटम: यदि 1 जून 2026 तक ग्रीनलैंड की बिक्री पर समझौता नहीं होता, तो इसे बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।
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यूरोपीय प्रतिक्रिया: डेनमार्क ने इसे “ब्लैकमेल” करार दिया है, जबकि मैक्रों ने चेतावनी दी है कि यूरोप इस डराने-धमकाने वाली नीति के आगे नहीं झुकेगा।
3. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव (2026-27)
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने इस तनाव को दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बताया है:
| क्षेत्र | प्रभाव का विवरण |
| वैश्विक विकास | IMF के अनुसार, इस व्यापारिक टकराव से वैश्विक GDP विकास दर में 0.3% की गिरावट आ सकती है। |
| मुद्रास्फीति (Inflation) | अमेरिका में आयातित सामान महंगे होने से आम जनता पर बोझ बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होगी। |
| EU का ‘ट्रेड बजूका’ | यूरोपीय संघ जवाब में 93 बिलियन यूरो के अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। |
| स्टॉक मार्केट | अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है। |
4. कूटनीतिक असर: नाटो (NATO) पर संकट
यह विवाद केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि नाटो की एकता को भी हिला रहा है। यूरोपीय देशों का मानना है कि ट्रंप का ग्रीनलैंड को “एनेक्स” (हड़पने) करने का प्रयास रूस के यूक्रेन पर आक्रमण को वैधता प्रदान कर सकता है। स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने कहा कि इससे “रूस दुनिया का सबसे खुश देश बन जाएगा।”
2026 का यह साल अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक निर्णायक मोड़ है। एक तरफ ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” और “लेन-देन की राजनीति” (Transactional Politics) है, तो दूसरी तरफ यूरोप की “नियम-आधारित व्यवस्था” को बचाने की कोशिश।
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