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बसंत पंचमी 2026: कब है सरस्वती पूजा? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. बसंत पंचमी का दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। साल 2026 में यह पर्व और भी खास संयोगों के साथ आ रहा है।

1. बसंत पंचमी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है।

  • तारीख: 22 जनवरी 2026 (गुरुवार)

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 21 जनवरी 2026 को शाम 06:15 बजे से।

  • पंचमी तिथि समाप्त: 22 जनवरी 2026 को रात 08:30 बजे तक।

  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक (कुल अवधि: लगभग 5 घंटे 20 मिनट)।

विशेष नोट: गुरुवार के दिन बसंत पंचमी का होना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि गुरु (बृहस्पति) और माँ सरस्वती दोनों ही विद्या और बुद्धि के प्रतीक हैं।

2. माँ सरस्वती की सरल पूजा विधि

इस दिन छात्र, कलाकार और संगीतकार विशेष रूप से माँ शारदा की वंदना करते हैं।

  1. शुद्धि: सुबह स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  2. स्थापना: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

  3. अर्पण: माँ को पीले फूल (खासकर गेंदा या सरसों के फूल), पीला गुलाल, अक्षत और पीले रंग की मिठाइयां (बूंदी के लड्डू या केसरिया भात) अर्पित करें।

  4. कलम और पुस्तक की पूजा: विद्यार्थी अपनी पुस्तकें और कलाकार अपने वाद्य यंत्र या कलम माँ के चरणों में रखें।

  5. मंत्र जाप: सरस्वती मंत्र का 108 बार जाप करें:

    • ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

  6. आरती: अंत में कपूर जलाकर माँ सरस्वती की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

3. पीले रंग का महत्व

बसंत पंचमी के दिन चारों ओर सरसों की पीली फसल लहलहाती है। पीला रंग हिंदू धर्म में शुद्धता, सात्विकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन केसरिया हलवा, पीले मीठे चावल और पीले वस्त्रों का उपयोग सुख-समृद्धि लाता है।

4. बच्चों के लिए ‘अक्षर अभ्यासम’

इस दिन छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत यानी ‘विद्यारंभ’ संस्कार करना सबसे उत्तम माना जाता है। माना जाता है कि आज के दिन पहली बार स्लेट पर अक्षर लिखने से बच्चा बुद्धिमान और ज्ञानवान बनता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।