विश्व आर्थिक मंच (WEF 2026) के दावोस शिखर सम्मेलन में यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक बयान दिया है। उन्होंने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (सभी समझौतों की जननी) करार दिया है।दावोस में अपने संबोधन के दौरान उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के “दहलीज” (Cusp) पर खड़े हैं। यह समझौता न केवल व्यापारिक होगा, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत और यूरोप की साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
1. समझौते की विशालता और प्रभाव
वॉन डेर लेयेन के अनुसार, यह समझौता दुनिया के दो सबसे बड़े बाजारों को एक साथ लाएगा:
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2 अरब लोगों का बाजार: भारत की विशाल जनसंख्या और यूरोपीय संघ के 27 देशों के संपन्न उपभोक्ता मिलकर 200 करोड़ से अधिक लोगों का एक साझा बाजार बनाएंगे।
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वैश्विक GDP का 25%: यह संयुक्त बाजार वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global GDP) के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा।
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सुपर डील: भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसे अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण समझौता बताया है।
2. गणतंत्र दिवस 2026 पर ऐतिहासिक घोषणा की तैयारी
इस समझौते की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा इस साल भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) समारोह में मुख्य अतिथि (Chief Guest) के रूप में शामिल हो रहे हैं।
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16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन: 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस शिखर सम्मेलन में औपचारिक रूप से समझौते के निष्कर्ष की घोषणा होने की प्रबल संभावना है।
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प्रगति: रिपोर्टों के अनुसार, समझौते के 24 अध्यायों (Chapters) में से 20 पर आम सहमति बन चुकी है।
3. किन क्षेत्रों में होगा बड़ा बदलाव?
यह समझौता केवल वस्तुओं (Goods) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाओं और तकनीक पर भी विशेष ध्यान दिया गया है:
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भारतीय निर्यात को लाभ: भारत के कपड़ा (Garments), फार्मास्यूटिकल्स, स्टील और इंजीनियरिंग सामानों पर यूरोपीय देशों में लगने वाले टैरिफ कम होंगे, जिससे निर्यात में भारी उछाल आएगा।
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कौशल और सेवाएं: भारतीय आईटी (IT) पेशेवरों और कुशल श्रमिकों के लिए यूरोप में काम करने और सेवा निर्यात करने के रास्ते सुगम होंगे।
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तकनीक और रक्षा: दोनों पक्ष रक्षा, हरित ऊर्जा (Green Energy) और स्वच्छ तकनीक (Clean Tech) में सहयोग बढ़ाएंगे।
4. चुनौतियां और अंतिम चरण की बाधाएं
हालांकि दोनों पक्ष समझौते के करीब हैं, लेकिन कुछ ‘सेंसिटिव’ मुद्दों पर अभी भी अंतिम चर्चा जारी है:
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CBAM (कार्बन टैक्स): यूरोपीय संघ द्वारा प्रस्तावित कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) पर भारत ने अपनी चिंताएं जताई हैं।
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कृषि: कृषि क्षेत्र को इस समझौते से फिलहाल बाहर रखा जा सकता है ताकि दोनों देशों के किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।
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शराब और ऑटोमोबाइल: यूरोपीय वाइन, स्पिरिट और लग्जरी कारों पर आयात शुल्क कम करने को लेकर अंतिम बातचीत चल रही है।
5. निष्कर्ष: वैश्विक मंदी और टैरिफ युद्ध के बीच उम्मीद
अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे नए व्यापारिक शुल्कों (Tariffs) और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत-EU समझौता एक स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक गलियारा प्रदान करेगा। यह समझौता भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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